जशपुर। एक मां की अपने बेटे के लिए पांच साल की अथक कानूनी लड़ाई आखिरकार रंग लाई। जिला न्यायालय ने 23 जून 2020 को बिजली के करंट से 75% दिव्यांग हुए अनूप भगत को 13 लाख 50 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति देने का आदेश देकर गरीब परिवार को बड़ी राहत दी है। यह घटना जशपुर के चिरोडिपा में एक घर के निर्माण कार्य के दौरान हुई थी, जहां अनूप बिजली के खंभे से फैले करंट की चपेट में आ गया था।
जशपुर के कोमड़ो गांव की निवासी जसंती बाई के बेटे अनूप भगत राजमिस्त्री का काम करके परिवार का भरण-पोषण करते थे। 23 जून 2020 को चिरोडिपा में सावित्री बाई के घर निर्माण के दौरान अनूप बिजली के खंभे से बारिश के पानी के जरिए फैले करंट की चपेट में आ गए। गंभीर रूप से घायल अनूप को जिला चिकित्सालय में प्राथमिक उपचार के बाद रायपुर रेफर किया गया। इस दुर्घटना ने अनूप को 75% दिव्यांग बना दिया, जिसके बाद जिला मेडिकल बोर्ड ने उन्हें दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी किया। अब अनूप बिस्तर से उठने और चलने-फिरने में असमर्थ हैं।
मां का संघर्ष और कानूनी लड़ाई
जसंती बाई ने अपने बेटे को न्याय दिलाने के लिए अधिवक्ता सत्य प्रकाश तिवारी के माध्यम से जिला न्यायालय में परिवाद दायर किया। परिवार पहले से ही आर्थिक तंगी से जूझ रहा था, क्योंकि अनूप परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था। उनके पिता जमुना राम बीमारी से पीड़ित हैं, और बहन रूचि कॉलेज में पढ़ाई कर रही है। जसंती बाई ने कर्ज लेकर अनूप का इलाज कराया और कानूनी लड़ाई लड़ी। न्यायाधीश शैलेश अचयुत पटवर्धन ने दोनों पक्षों के तर्कों और सबूतों की जांच के बाद मकान मालकिन सावित्री बाई और राज्य विद्युत मंडल को संयुक्त रूप से 13 लाख 50 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया।
आर्थिक संकट और सरकारी सहायता
जसंती बाई ने बताया कि दुर्घटना के बाद परिवार गंभीर आर्थिक संकट में है। अनूप को सरकारी सहायता के रूप में केवल 500 रुपये मासिक दिव्यांग पेंशन मिल रही है। कोर्ट के इस फैसले से परिवार को आर्थिक सहायता की उम्मीद जगी है, लेकिन अनूप का भविष्य अभी भी चुनौतियों से भरा है, क्योंकि वह पूरी तरह से दूसरों पर निर्भर हैं।
अन्य पीड़ितों के लिए प्रेरणा
अधिवक्ता सत्य प्रकाश तिवारी ने इस फैसले को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इस तरह के मामलों में अक्सर पीड़ितों को मुआवजा नहीं मिल पाता। जिला न्यायालय का यह निर्णय अन्य पीड़ितों को अपने कानूनी अधिकारों के लिए लड़ने की प्रेरणा देगा। उन्होंने कहा, “यह फैसला न केवल अनूप और उनके परिवार के लिए, बल्कि उन सभी के लिए उम्मीद की किरण है, जो ऐसी घटनाओं का शिकार होते हैं।”
Editor – Niraj Jaiswal
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