कोरबा।केंद्र सरकार की संशोधित वितरण क्षेत्र योजना (RDSS) के तहत कोरबा जिले में 110 करोड़ रुपये के कार्य में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। बिजली वितरण को सुदृढ़ करने के लिए 60 किलोमीटर निम्न दाब (एलटी) लाइनों की खुली तारों को ISI और BS प्रमाणित एरियल बंच केबल (ABC) से बदलने का काम किया गया, लेकिन इसमें घटिया सामग्री का उपयोग किया गया। प्रारंभिक जांच के बाद कार्यपालन अभियंता (ईई) अभिमन्यु कश्यप को निलंबित कर दिया गया है, और मामले की विस्तृत जांच के लिए 40 सदस्यों वाली 12 टीमें गठित की गई हैं।
घोटाले का खुलासा
केंद्र सरकार ने RDSS योजना के तहत छत्तीसगढ़ को 60 हजार करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है। भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में वित्तीय वर्ष 2022-23 में कोरबा में 110 करोड़ रुपये की निविदा पुणे की एसटी इलेक्ट्रिकल्स और जांजगीर-चांपा के भुवनेश्वर साहू को दी गई। निविदा शर्तों का उल्लंघन करते हुए 70 एमएम ABC केबल की जगह लोकल और घटिया केबल का उपयोग किया गया। साइड लाइनों में 50 से 16 एमएम के केबल लगाए जाने थे, लेकिन ज्यादातर स्थानों पर निम्न गुणवत्ता की सामग्री इस्तेमाल की गई। उदाहरण के तौर पर, 100 रुपये की लागत वाले ब्रांडेड सामान की जगह 65 रुपये में 35% सस्ती घटिया सामग्री खरीदी गई।
निगरानी में लापरवाही के चलते अधिकारियों ने भौतिक सत्यापन किए बिना भुगतान कर दिया, जिससे यह घोटाला और गहरा हो गया।
अन्य जिलों में भी गड़बड़ी
कोरबा के अलावा बिलासपुर (66.72 करोड़), मुंगेली (23.37 करोड़), और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (20 करोड़) में भी इसी तरह की गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आई हैं। जांजगीर-चांपा के कार्यपालन अभियंता एचके मंगेशकर को भी तत्काल निलंबित कर दिया गया है। घोटाले की जांच की आंच रायपुर मुख्यालय तक पहुंची, जिसके चलते मुख्य अभियंता (प्रोजेक्ट) राजेंद्र प्रसाद का स्थानांतरण कर दिया गया।
जांच और कार्रवाई
विद्युत वितरण विभाग के अधीक्षण यंत्री पीएल सिदार ने बताया कि कार्यपालन निदेशक एके अम्बस्ट के आदेश पर 12 जांच टीमें गठित की गई हैं, जो 10 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेंगी। इन टीमों का मुख्य ध्यान कार्य की गुणवत्ता और मात्रा की जांच पर है। सेंधरी (बिलासपुर) और मुंगेली के स्टोर रूम में रखे केबल, कंडक्टर, और ट्रांसफार्मर के बीपी चैनल की जांच की गई, और सैंपल लेकर स्टोर रूम को सील कर दिया गया है।
एसटी इलेक्ट्रिकल्स पर 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है, और ठेकेदार कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। ब्लैक लिस्ट करने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।
भ्रष्टाचार की परतें खुलने की उम्मीद
जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, भ्रष्टाचार की और परतें खुलने की संभावना है। विद्युत वितरण विभाग ने स्पष्ट किया कि दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह घोटाला न केवल वित्तीय अनियमितता को उजागर करता है, बल्कि बिजली वितरण व्यवस्था की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाता है।
Editor – Niraj Jaiswal
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