कोरबा। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) के गेवरा प्रोजेक्ट में प्रबंधन ने एक आदेश के तहत 54 कर्मचारियों की संडे ड्यूटी, ओवरटाइम (ओटी), और पेड हॉलीडे (पीएचडी) की सुविधाएं छीन ली हैं। हालांकि, यूनियनों के प्रभावी नेताओं और उनके करीबी सहयोगियों को इन सुविधाओं से वंचित नहीं किया गया है, जिससे प्रबंधन की नीयत पर सवाल उठ रहे हैं।
आदेश संख्या 8302025 का विवाद
एसईसीएल गेवरा प्रोजेक्ट के प्रबंधक द्वारा जारी आदेश संख्या 8302025 के अनुसार, मुख्यालय बिलासपुर के पत्र क्रमांक 152/16 अप्रैल 2015 के अनुपालन में यह व्यवस्था लागू की गई है। आदेश में कहा गया है कि जो कर्मचारी अपना मूल कार्य छोड़कर लाइट जॉब या वैकल्पिक जॉब कर रहे हैं, उन्हें संडे ड्यूटी, ओवरटाइम, और पेड हॉलीडे की सुविधाएं नहीं दी जाएंगी। इस आदेश को डिप्टी जीएम की विशेष रुचि से जारी किया गया है, जबकि सामान्यतः ऐसे आदेश कार्मिक विभाग द्वारा जारी होते हैं।
प्रभावित कर्मचारियों की श्रेणियां
इस व्यवस्था से वेस्ट एमटीके के 15, वर्कशॉप एमटीके के 17, ईस्ट एमटीके के 8, और साइलो एमटीके के 14 कर्मचारी प्रभावित हुए हैं। प्रभावित कर्मचारियों में डोजर ऑपरेटर, सॉवेल ऑपरेटर, केबलमेन, असिस्टेंट फोरमेन, ड्राइवर, ईपी इलेक्ट्रिशियन, डंपर ऑपरेटर, ड्रील ऑपरेटर, पे लोडर, क्रेन ऑपरेटर, लॉरी क्लीनर, फीडर ब्रेकर ऑपरेटर, मैकेनिकल फीटर, असिस्टेंट लोडिंग ऑपरेटर, एसपीडीटी, मैकेनिकल फीटर हेल्पर, कन्वेयर ऑपरेटर, और जनरल मजदूर शामिल हैं।
यूनियन नेताओं को विशेष छूट
सूत्रों का दावा है कि कुछ यूनियनों के प्रभावी नेताओं और उनके करीबी सहयोगियों को इस आदेश से बाहर रखा गया है। उन्हें हल्के कार्य आवंटित कर सुविधाएं बरकरार रखी गई हैं, जबकि अन्य कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। यह पक्षपातपूर्ण रवैया कर्मचारियों में असंतोष का कारण बन रहा है।
यूनियनों का विरोध
कुछ यूनियनों ने इस व्यवस्था को कर्मचारियों के आर्थिक हितों पर कुठाराघात बताया है। कोयला उत्पादन और बेहतर कार्य संस्कृति पर जोर देने वाली यूनियनों ने इस आदेश के खिलाफ विरोध जताया है। वे इस मामले को एसईसीएल मुख्यालय, कोयला मंत्रालय, और कोल इंडिया तक ले जाने की तैयारी कर रही हैं।
प्रबंधन पर पक्षपात का आरोप
गेवरा प्रोजेक्ट में नियम-कायदों को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। इस आदेश ने एक बार फिर प्रबंधन की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि प्रबंधन का यह कदम न केवल उनके आर्थिक हितों को प्रभावित कर रहा है, बल्कि यूनियन नेताओं के प्रति पक्षपात को भी उजागर करता है।
Editor – Niraj Jaiswal
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