मसीही समाज का प्रदर्शन: चर्च पर हमले और मारपीट के खिलाफ राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन

कोरबा जिले में मसीही समाज ने अपने समुदाय के खिलाफ हो रही कार्रवाइयों, विशेष रूप से चर्चों और प्रार्थना स्थलों पर तोड़फोड़ और मारपीट के विरोध में धरना-प्रदर्शन किया। मसीही समाज के लोगों ने घंटाघर से सुभाष चौक और कोसा बाड़ी तक प्रदर्शन कर अपनी मांगें उठाईं और राज्यपाल के नाम जिला प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा। इस आंदोलन को समर्थन देने के लिए भीम आर्मी के कार्यकर्ता भी सुभाष चौक पहुंचे।

सुबह से ही कोरबा के घंटाघर, सुभाष चौक और कोसा बाड़ी क्षेत्र में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था।

जानकारी थी कि मसीही समाज के लगभग 50,000 लोग प्रदर्शन के लिए एकत्रित हो सकते हैं, लेकिन सुभाष चौक पर कुछ सौ लोग ही जमा हुए। प्रदर्शनकारियों ने चर्चों पर हमले और प्रार्थना सभाओं में बाधा डालने की घटनाओं का कड़ा विरोध किया। मसीही समाज के सदस्यों ने कहा कि भारतीय संविधान उन्हें पूजा और आराधना की स्वतंत्रता देता है, लेकिन धर्म परिवर्तन के नाम पर उनके साथ मारपीट और उत्पीड़न किया जा रहा है।

मसीही समाज के इस आंदोलन को समर्थन देने के लिए भीम आर्मी के कार्यकर्ता भी सुभाष चौक पर मौजूद थे। भीम आर्मी के पदाधिकारी राजकुमार जांगड़े ने कहा, “भारतीय संविधान हमें जो स्वतंत्रता और अधिकार देता है, उसे छीनने की कोशिश की जा रही है।

जातिवादियों द्वारा लोगों को प्रताड़ित किया जा रहा है।” उन्होंने मसीही समाज के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की मांग की।

प्रदर्शनकारियों ने ज्ञापन में मांग की कि उनके धार्मिक स्थलों पर हमले और प्रार्थना सभाओं में बाधा डालने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि संविधान के तहत उन्हें अपने धर्म का पालन करने का पूरा अधिकार है, और धर्म परिवर्तन के झूठे आरोप लगाकर उनके समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है।

प्रदर्शन को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुबह से ही सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। घंटाघर से कोसा बाड़ी तक पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की भारी तैनाती की गई थी ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे। प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा और किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।

कोरबा में मसीही समाज का यह प्रदर्शन धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। समाज ने अपनी एकता और शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाकर यह संदेश दिया है कि वे अपने अधिकारों के लिए लड़ने को तैयार हैं। प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच का आश्वासन दिया है।