नई दिल्ली/रायपुर। छत्तीसगढ़ के प्रख्यात साहित्यकार, समीक्षक, और हिन्दी भाषा के समर्पित सेवक डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ को कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय, भारत सरकार की हिन्दी सलाहकार समिति का राष्ट्रीय सदस्य नामित किया गया है।
यह नियुक्ति गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग द्वारा केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय की अनुमति से की गई है।
राजभाषा विभाग की संयुक्त सचिव डॉ. मीनाक्षी जौली ने 8 अगस्त 2025 को इसकी आधिकारिक सूचना जारी की।
इस समिति में देश भर से केवल तीन गैर-सरकारी सदस्य चुने गए हैं, जिनमें डॉ. माणिक विश्वकर्मा के साथ हरियाणा की नेहा धवन और चेन्नई की श्रीश्री कांथा कन्नन शामिल हैं।
डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ ने एनटीपीसी कोरबा से उप महाप्रबंधक के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद अपना जीवन हिन्दी भाषा और साहित्य के विकास के लिए समर्पित किया है। 1971 से साहित्य सृजन में सक्रिय, उनकी 15 कृतियाँ प्रकाशित हो चुकी हैं, और 5 अन्य प्रकाशन की प्रक्रिया में हैं। उनकी रचनाएँ सैकड़ों पत्र-पत्रिकाओं में छप चुकी हैं, और वे 200 से अधिक समीक्षाएँ लिख चुके हैं।
उनकी लेखन शैली सरल, आकर्षक, और मानव मूल्यों को प्रोत्साहन देने वाली है, जो उन्हें साहित्य जगत में विशिष्ट बनाती है। उन्होंने नवछंद विधान ‘हिंदकी’ का निर्माण किया और संकेत साहित्य समिति के माध्यम से 44 वर्षों से नए रचनाकारों को प्रोत्साहित किया है। पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक मुद्दों पर उनकी सक्रियता भी उल्लेखनीय है, जिसमें उन्होंने हजारों पेड़ लगवाए हैं।
डॉ. विश्वकर्मा वर्तमान में संकेत साहित्य समिति (संस्थापक व प्रांतीय अध्यक्ष), मय-मनु विश्वकर्मा संघ (प्रांतीय संरक्षक), पं. मुकुटधर पांडे साहित्य भवन समिति, राष्ट्रीय कवि संगम, संस्कार भारती, और हिन्दी साहित्य भारती, छत्तीसगढ़ जैसी संस्थाओं से जुड़े हैं। उन्होंने इस नियुक्ति को छत्तीसगढ़ और अपने परिवार के लिए गौरव का क्षण बताते हुए केंद्र व राज्य सरकार तथा भाजपा के शीर्ष नेतृत्व का आभार व्यक्त किया।
वे तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास में हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिए प्रतिबद्ध हैं और इस जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा से निभाने का संकल्प लिया है।
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