कोरबा।जब पूरा देश और कोरबा जिला स्वतंत्रता दिवस का जश्न मना रहा था, तब गेवरा खदान परियोजना से प्रभावित ग्राम नरईबोध के लोग अपने अधिकारों के लिए चिंतन-मनन में जुटे थे। एसईसीएल गेवरा परियोजना के तहत बसाहट और रोजगार के मुद्दों पर 25 जुलाई 2025 को हुई बैठक में बनी सहमति पर अमल न होने से ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। अब वे एक बार फिर आंदोलन की राह पर हैं।
25 जुलाई को अनुविभागीय अधिकारी (SDM) कटघोरा और विधायक प्रेमचंद पटेल की मौजूदगी में गेवरा के महाप्रबंधक कार्यालय में हुई बैठक में बसाहट और रोजगार के मुद्दों पर चर्चा हुई थी। ग्राम नरईबोध के लिए खम्हरिया के पास जरहाजेल की अधिग्रहित जमीन पर बसाहट स्थल चयनित किया गया, जिसमें 333 प्लॉट उपलब्ध हो सकते हैं। इसके अलावा, 450 हितग्राहियों और 200 भूमिहीन परिवारों को मुआवजा देने की बात कही गई थी। हालांकि, इस दिशा में कोई प्रगति नहीं होने से ग्रामीणों का गुस्सा बढ़ रहा है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
बसाहट और मुआवजा: ग्रामीणों ने खम्हरिया के पास जरहाजेल की जमीन पर बसाहट के लिए कार्यवाही की स्थिति और भूमिहीन परिवारों को मुआवजा देने की मांग की। SDM ने बताया कि बिलासपुर मुख्यालय से अनुमोदन के लिए पत्राचार किया जाएगा।
परिसम्पत्तियों का मुआवजा: ग्रामीणों ने किसी अन्य की भूमि पर बने मकानों के मुआवजे के लिए भूमि स्वामी की सहमति की अनिवार्यता का विरोध किया। SDM ने इसे नियमानुसार जरूरी बताया।
रोजगार: ग्रामीणों ने गेवरा खदान की ठेका कंपनियों में स्थानीय लोगों को वैकल्पिक रोजगार देने की मांग की। SDM ने इसके लिए नियमावली तैयार करने और आधार कार्ड, वोटर आईडी, राशन कार्ड व बैंक विवरण के आधार पर प्राथमिकता तय करने की सलाह दी।
पुरानी परिसम्पत्तियों में कटौती: ग्रामीणों ने पुरानी परिसम्पत्तियों में परिवार बढ़ने के कारण नए निर्माण पर कटौती न करने की मांग की। SDM ने इसकी जांच कर सकारात्मक निर्णय का आश्वासन दिया।
फौती नामांतरण: फौती नामांतरण के प्रकरणों को जल्द निपटाने की मांग पर SDM और तहसीलदार ने शीघ्र कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
घटते क्रम की सूची: 0.51 एकड़ भूमि वाले 5 खातेदारों को रोजगार की पात्रता की संभावना बताई गई, जबकि अन्य 5 को बाहर रखा गया। यह निर्णय संशोधित सूची के आधार पर होगा।
ग्रामीणों की नाराजगी
ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में हुए समझौतों और बैठकों के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। जिला पुनर्वास समिति की 2010 की बैठक में नरईबोध का नाम शामिल नहीं होने और परिसम्पत्तियों में 40-60% कटौती जैसे मुद्दों पर भी असंतोष है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं, तो वे आंदोलन तेज करेंगे।
प्रशासन और SECL की प्रतिक्रिया
SDM कटघोरा ने ग्रामीणों को नियमानुसार कार्रवाई का भरोसा दिलाया, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार आश्वासन के बावजूद कोई प्रगति नहीं हो रही। SECL ने भी रोजगार और बसाहट के लिए कुछ कदम उठाने की बात कही, पर ग्रामीण इसे नाकाफी मानते हैं।
यह मामला कोरबा के खदान प्रभावित गांवों की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं को उजागर करता है। ग्रामीणों की नाराजगी और आंदोलन की चेतावनी से स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।
Editor – Niraj Jaiswal
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