स्वतंत्रता दिवस के उत्सव में शासकीय स्कूल की लापरवाही, बच्चों को परोसा गया कीड़ों से युक्त चना

कोरबा-हरदीबाजार। स्वतंत्रता दिवस के राष्ट्रीय पर्व पर जहां पूरा देश उमंग और उत्साह के साथ 79वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा था, वहीं कोरबा जिले के मुड़ापार स्थित शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। स्कूल में बच्चों को मिड-डे मील के तहत कीड़ों से युक्त चना परोसा गया, जिसने बच्चों के स्वास्थ्य को गंभीर खतरे में डाल दिया। इस घटना ने स्कूल प्रशासन और मिड-डे मील योजना की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्वतंत्रता दिवस समारोह के बीच खुलासा

मुड़ापार के शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया और छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलन के साथ पूजा-अर्चना की गई। शिक्षकों ने छात्र-छात्राओं को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं और प्रसाद वितरण का कार्यक्रम आयोजित किया गया। समारोह में सरपंच, पंच और ग्रामीणों की उपस्थिति रही। हालांकि, इस उत्सव के बीच स्कूल की बदहाल स्थिति और बच्चों को परोसे गए कीड़ों से युक्त भोजन ने सभी को स्तब्ध कर दिया।

मिड-डे मील में कीड़ों से भरा चना

खुलासे के अनुसार, प्रेरणा स्व-सहायता समूह द्वारा संचालित मिड-डे मील योजना के तहत बच्चों को कीड़ों से युक्त चना परोसा गया। यह भोजन किसी बाहरी आपूर्तिकर्ता द्वारा प्रदान किया जा रहा था, जिसकी गुणवत्ता पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। बच्चों के लिए न तो पर्याप्त बैठने की व्यवस्था थी और न ही पौष्टिक भोजन की सुविधा। इस लापरवाही ने न केवल बच्चों के स्वास्थ्य को खतरे में डाला, बल्कि स्कूल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं।

बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़

जब पूरा देश बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की बात कर रहा है, तब मुड़ापार के इस शासकीय स्कूल में बच्चों की जिंदगी को खतरे में डाला जा रहा है। कीड़ों से युक्त भोजन के सेवन से बच्चों को गंभीर बीमारियां हो सकती हैं, जैसे कि खाद्य विषाक्तता या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं। अभिभावकों और ग्रामीणों ने इस घटना पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है और सवाल उठाया है कि ऐसी लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है?

प्रशासन की लापरवाही पर सवाल

यह घटना स्कूल प्रशासन और मिड-डे मील योजना के संचालन में गंभीर लापरवाही को उजागर करती है। ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि बच्चों के भविष्य के साथ इस तरह का खिलवाड़ अस्वीकार्य है। उन्होंने शासन-प्रशासन से इस मामले की गहन जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। जिला शिक्षाधिकारी करणसिंह भिलाला ने इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित की है, जिसमें तीन प्राचार्य शामिल हैं। बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष साकेत शर्मा ने इसे गंभीर मामला बताते हुए शिक्षा संस्थानों में ऐसी लापरवाही पर कठोर कार्रवाई की मांग की है।

ग्रामीणों में आक्रोश, सजा की मांग

इस घटना ने स्थानीय समुदाय में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के साथ इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने दोषी स्व-सहायता समूह और भोजन आपूर्तिकर्ता के खिलाफ कड़ी सजा की मांग की है। ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि स्कूल में बच्चों के लिए बेहतर सुविधाएं, जैसे कि पर्याप्त बैठने की व्यवस्था और गुणवत्तापूर्ण भोजन, सुनिश्चित किया जाए।

मुड़ापार के शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला में हुई इस घटना ने मिड-डे मील योजना के संचालन और स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। स्वतंत्रता दिवस जैसे पवित्र अवसर पर बच्चों को कीड़ों से युक्त भोजन परोसना न केवल शर्मनाक है, बल्कि यह शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही का जीता-जागता सबूत है।

शासन-प्रशासन से अपेक्षा की जाती है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को कठोर दंड देकर भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जाए।