हादसे में गई जिंदगी, 15 लाख मुआवजा और रोजगार पर सहमति

घटना को लेकर कई घंटे चक्काजाम किया सहकर्मियों ने

कोरबा। एसईसीएल की गेवरा खदान में हुए हादसे में इलेक्ट्रिशियन हीरा की 6.6 केवी लाइन के संपर्क में आने से मौत हो गई। यह घटना उस समय घटी। जब पीक्यू सर्किट के बैकअप क्षेत्र में मेंटेनेंस का कार्य चल रहा था। घटना के दूसरे दिन नाराज सहकर्मियों ने मुआवजा और रोजगार को लेकर गेवरा बेरियर 7 के पास चक्काजाम कर दिया।

बाद में प्रशासन और पुलिस ने संज्ञान लिया। मृतक के परिवार को 15 लाख का मुआवजा और एक आश्रित को रोजगार देने पर कंपनी सहमत हुई तब प्रदर्शन समाप्त हुआ।

बुधवार को मेगा प्रोजेक्ट गेवरा खदान में काम कर रही नागार्जुन कंपनी द्वारा मेंटेनेंस कार्य कराया जा रहा था।

बताया जा रहा है कि 6.6 केवी लाइन में स्पार्किंग के कारण सुधार कार्य के लिए हीरा और उनके सहयोगी विवेक पटेल मौके पर पहुंचे थे। इसी दौरान अचानक हीरा करंट की चपेट में आ गए। साथी कर्मचारियों ने उन्हें तत्काल नेहरू शताब्दी चिकित्सालय पहुँचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

खबर के अनुसार सुरक्षा मानकों में लापरवाही का आरोप लगाते हुए यहां के कर्मचारियों ने चक्काजाम कर दिया जिससे मौके पर अजीब स्थिति निर्मित हो गई। काफी देर तक चले प्रदर्शन के बाद इस मामले में समाधान हो सका।

दीपका थाना प्रभारी प्रेमचंद साहू ने बताया कि की कंपनी के अधिकारियों को बुलाया गया और मृतक के परिवार को 1 लाख रुपए तत्काल सहायता और 15 लाख रुपए का चेक दिलाया गया और साथ ही निजी कंपनी में परिवार के सदस्य को नौकरी देने पर भी सहमति बनी।

खदान क्षेत्र में अलग-अलग कारणों से आए दिन हादसे हो रहे हैं। ऐसी घटनाओं में जिंदगियां तबाह हो रही है और उनके परिवारों के सामने अगले भविष्य की चुनौतियां खड़ी हो रही है। इसलिए पूछा जा रहा है कि इस प्रकार के मसलों का समाधान आखिर क्या है और प्रबंधन इस दिशा में क्या कोशिश कर रहा है।

आए दिन हो रहे हादसे, उठे सवाल
कोल फिल्ड्स के अंतर्गत दुर्घटनाओं का सिलसिला चरणबद्ध रूप से बना हुआ है। या तो गाडिय़ां पलटने से अनहोनी हो रही है या फिर सुधार अथवा ऑपरेशनल कंडीशन में ऐसी घटनाएं होने के कारण कर्मियों एवं सहयोगियों की मौत ने प्रबंधन के लिए चुनौती खड़ी कर दी है।

कई बार ऐसे आरोप लग चुके हैं कि सही समय पर मेन्टेनेंस नहीं कराने के कारण ऐसी घटनाएं हो रही है। यह बात अलग है कि स्थानीय स्तर पर सेफ्टी कमेटी और बड़े स्तर पर डीजीएमएस जैसी जांच के बावजूद वह कार्यवाही नहीं हो पाती जिसकी अपेक्षा की जाती है।