कोरबा में एक दुखद घटना ने सभी को झकझोर कर रख दिया। कुसमुंडा थाना क्षेत्र के सर्वमंगला पुलिस चौकी अंतर्गत दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के कोरबा-गेवरारोड रेल जंक्शन पर बीती रात करीब 11 बजे एक फोटोग्राफर मनोज कुमार ने ट्रेन के सामने कूदकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। मनोज कर्ज के बोझ और आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे, जिसके चलते उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठाया।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, मनोज कुमार मानिकपुर चौकी क्षेत्र के दादरखुर्द निवासी थे और सर्वमंगला मंदिर क्षेत्र में फोटोग्राफी का काम करते थे। उनकी आय सीमित थी, जिससे परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो रहा था। कर्ज के बोझ तले दबे मनोज ने कई बार समाधान तलाशने की कोशिश की, लेकिन कोई रास्ता न निकलने पर उन्होंने यह कदम उठाया।
घटना से पहले मनोज ने अपने मोबाइल और अन्य सामान पुराने बस स्टैंड पर एक मित्र के पास छोड़ा और फिर रेलवे ट्रैक की ओर चले गए। रात करीब 11 बजे ट्रेन के बेहद करीब आने पर वे अचानक ट्रैक पर कूद गए, जिससे उनकी मौके पर ही मृत्यु हो गई। सर्वमंगला पुलिस ने तत्काल मौके पर पहुंचकर मर्ग पंचनामा सहित आवश्यक कार्रवाई की।
मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि आत्महत्या की घटनाओं के पीछे अवसाद, चिंता और असफलता जैसे कारक प्रमुख हैं। मनोज के मामले में भी कर्ज और आर्थिक तंगी ने उन्हें मानसिक रूप से तोड़ दिया। विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार असफलता और समाधान न मिलने की स्थिति में लोग इस तरह के खतरनाक कदम उठा लेते हैं।
म्यूजिक के क्षेत्र में काम करने वाले सत्या जायसवाल ने बताया कि 1985 में “जिंदगी एक जंग” गीत ने आत्महत्या की घटनाओं को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इस गीत के सकारात्मक संदेश ने लोगों को प्रेरित किया था। विशेषज्ञों का मानना है कि समाज में जागरूकता और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने से ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।
मनोज कुमार की इस दुखद घटना ने एक बार फिर समाज को आर्थिक तनाव और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति गंभीरता से सोचने पर मजबूर किया है। प्रशासन और सामाजिक संगठनों को मिलकर ऐसे लोगों की मदद के लिए कदम उठाने की जरूरत है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
Editor – Niraj Jaiswal
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