कोरबा-कटघोरा। कटघोरा वन मंडल में पदस्थ उप वन मंडलाधिकारी (SDO) संजय त्रिपाठी पर सुशासन तिहार 2025 के दौरान भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप फिर से चर्चा में हैं। त्रिपाठी पर पूर्व में मरवाही वन मंडल में 1.02 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता और फर्जी समितियों के जरिए शासकीय राशि के दुरुपयोग का आरोप है, जिसके लिए निलंबन, FIR और रिकवरी की कार्यवाही दो वर्षों से लंबित है। सुशासन तिहार के तहत हालिया शिकायत के बाद यह मामला एक बार फिर शासन के समक्ष पहुंचा है, जिससे सवाल उठ रहे हैं कि क्या इस बार कार्रवाई धरातल पर उतरेगी या त्रिपाठी को संरक्षण मिलता रहेगा?
जांच में दोषी, फिर भी कार्रवाई लंबित
प्रमुख सचिव, छत्तीसगढ़ शासन, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को 6 मार्च 2023 को प्रेषित पत्र के अनुसार, मरवाही वन मंडल में त्रिपाठी की पदस्थापना के दौरान रोपणी प्रबंधन समिति चिचगोहना और नेचर कैंप प्रबंधन समिति जामवंत माड़ा गगनई (साल्हेकोटा परिसर) में अनियमितताएं पाई गईं।
तत्कालीन बिलासपुर वन मंडल अधिकारी कुमार निशांत की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय जांच समिति ने त्रिपाठी को दोषी पाया। समिति के अनुसार, त्रिपाठी ने फर्जी समितियों का गठन कर शासकीय राशि को अवैधानिक खातों में जमा किया और 99,30,643 रुपये का अनियमित व्यय किया।
इसके अतिरिक्त, नेचर कैंप गगनई में निविदा नियमों का उल्लंघन कर बाजार दर से अधिक मूल्य पर सामग्री खरीदने से 2,69,422 रुपये की हानि हुई। कुल मिलाकर 1,02,00,065 रुपये की वसूली प्रस्तावित है।
निलंबन प्रस्तावित, लेकिन कार्रवाई अधर में
जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर त्रिपाठी को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत निलंबित करने और अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने का प्रस्ताव दिया गया था। हालांकि, दो वर्ष से अधिक समय बीतने के बावजूद न तो निलंबन लागू हुआ और न ही FIR दर्ज की गई। सूत्रों के अनुसार, त्रिपाठी को कटघोरा वन मंडल में वर्तमान DFO कुमार निशांत के अधीन फिर से महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, जो स्वयं जांच समिति के अध्यक्ष थे। यह स्थिति वन विभाग में भ्रष्टाचार पर सवाल उठाती है।
सुशासन तिहार में फिर उठा मुद्दा
सुशासन तिहार 2025 के दौरान कटघोरा वन मंडल में त्रिपाठी के खिलाफ नई शिकायतें सामने आई हैं, जिनमें योजनाओं में करोड़ों रुपये के गबन का आरोप शामिल है। ये शिकायतें शासन तक पहुंच चुकी हैं, और जनता में यह सवाल गूंज रहा है कि क्या इस बार त्रिपाठी पर कार्रवाई होगी समाधान शिविरों में उठाए गए मुद्दों के त्वरित निराकरण की अपेक्षा के बीच त्रिपाठी जैसे मामलों में देरी से सुशासन की प्रतिबद्धता पर सवाल उठ रहे हैं।
क्या होगी कार्रवाई?
कटघोरा वन मंडल में त्रिपाठी और DFO निशांत की कार्यशैली पर सवाल उठने के बावजूद कार्रवाई में देरी से स्थानीय लोगों में आक्रोश है। यदि सुशासन तिहार के तहत इस मामले में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह शासन की भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति पर सवालिया निशान लगा सकता है। फिलहाल, शासन से इस मामले में त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है।
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