कोरबा । दादरखुर्द में जमीन बिक्री के नाम पर धोखाधड़ी का सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसमें परशुराम नगर, दादर निवासी प्रोफेसर सुरेशचंद्र तिवारी और उनकी पत्नी सुधा तिवारी को 16.50 लाख रुपये की ठगी के लिए दोषी ठहराया गया है।
न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी सत्यानंद प्रसाद ने दोनों आरोपियों को धारा 420 और 120बी भा.दं.सं. के तहत 3-3 साल के कठोर कारावास और 10,000-10,000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। साथ ही, पीड़ित को हुए नुकसान की भरपाई के लिए आरोपियों को 16.50 लाख रुपये के साथ 6% साधारण ब्याज सहित कुल 25.50 लाख रुपये 3 महीने के भीतर लौटाने का आदेश दिया गया है।
मामले की शुरुआत 10 जुलाई 2020 को हुई, जब पीड़ित जगदीश मिश्रा ने मानिकपुर पुलिस सहायता केंद्र (थाना-कोतवाली) में शिकायत दर्ज की। बिहार सरकार से अंडर सेक्रेटरी के पद से रिटायर जगदीश मिश्रा ने बताया कि उनके छोटे भाई मदन मिश्रा, जो 2012-14 के दौरान एसईसीएल दीपका में जनरल मैनेजर थे, के माध्यम से उन्हें दादरखुर्द में जमीन खरीदने का प्रस्ताव मिला।
अरुण त्रिपाठी ने सुरेशचंद्र तिवारी से मिलवाया, जिन्होंने अपनी पत्नी के नाम पर दर्ज 12 डिसमिल जमीन (खसरा नंबर 905/2) बेचने की बात कही। सौदा 16.50 लाख रुपये में तय हुआ और रजिस्ट्री करा दी गई।
लेकिन नामांतरण के दौरान पता चला कि जमीन तिवारी दंपती के नाम पर थी ही नहीं। जब पीड़ित ने पैसे वापस मांगे तो उनके साथ मारपीट और धमकी दी गई।
जिला लोक अभियोजक एसके मिश्रा की पैरवी के बाद कोर्ट ने तिवारी दंपती को आपराधिक षड्यंत्र और धोखाधड़ी का दोषी पाया। सजा के तहत दोनों को 3-3 साल की जेल और अर्थदंड देना होगा। अर्थदंड न चुकाने पर अतिरिक्त 6-6 महीने की सजा भुगतनी होगी।
कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि यदि आरोपी 25.50 लाख रुपये का भुगतान नहीं करते, तो यह राशि जुर्माने की तरह वसूली जाएगी।
इस फैसले से पीड़ित को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है, साथ ही यह मामला जमीन सौदों में सतर्कता बरतने की चेतावनी भी देता है।
Editor – Niraj Jaiswal
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