माटी अधिकार मंच ने एसईसीएल मुख्यालय में दिया धरना

6 घंटे लगातार जारी रहा प्रदर्शन

कोरबा। माटी अधिकार मंच ने एसईसीएल मुख्यालय बिलासपुर में गेट जाम धरना प्रदर्शन किया। जिसमें लगभग 250 से अधिक भूविस्थापित महिला पुरुष शामिल हुए। इस दौरान कुसमुंडा, कोरबा, गेवरा, दीपका क्षेत्र के भू-विस्थापित उपस्थित रहे। प्रदर्शन के दौरान भू-विस्थापितों ने जमकर अपनी भड़ास निकली।


धरना प्रदर्शन के दौरान एसईसीएल मुख्यालय के अधिकारियों ने कई बार वार्ता करने की प्रस्ताव रखी, परंतु जवाबदार अधिकारी से बात करने की शर्त पर संगठन के अध्यक्ष ब्रजेश श्रीवास अड़े रहे। संगठन ने महाप्रबंधक श्रम शक्ति एवं महाप्रबंधक भू-राजस्व के साथ वार्ता के लिए मना कर दिया।

डायरेक्टर योजना परियोजना के मुख्यालय से बाहर नागपुर में मीटिंग में सम्मिलित होने के कारण 13 मार्च को मीटिंग किया जाना तय किया गया जिसमें डायरेक्टर, मैनपॉवर लीगल, औद्योगिक संबंध के अधिकारी उपस्थित रहेंगे।

संगठन ने अधिकारियों को कहा कि अगर मीटिंग की तिथि में परिवर्तन की जाती है या सकारात्मक निर्णय नहीं लिए जाते हैं तब बगैर सूचना के 17 मार्च को मुख्यालय में पुन: अनिश्चित कालीन गेट जाम धरना प्रदर्शन किया जाएगा।

धरना प्रदर्शन के दौरान एसईसीएल के अधिकारियों का व्यवहार को देखकर विस्थापितों में काफी आक्रोश व्याप्त था। सकारात्मक निर्णय नहीं आने पर शीघ्र ही उत्पादन बाधित किया जाएगा।

धरना प्रदर्शन के दौरान उपस्थित अधिकारियों से माटी अधिकार मंच के अध्यक्ष ब्रजेश श्रीवास ने मांग रखी कि अर्जन के बाद जन्म संबंधी मामलों में उच्च न्यायालय बिलासपुर का आदेश आ गया है।

आदेशानुसार अर्जन के बाद जन्म लिए व्यक्ति रोजगार के लिए पात्र है। शीघ्र ही इस आदेश को आधार बनाकर अर्जन के बाद जन्म लिए सभी व्यक्तियों को वन टाइम सेटलमेंट के तहत रोजगार प्रदान किया जाए।

इसके साथ ही बुड़बुड़, राहाडीह के छोटे खातेदारों के लिए उच्च न्यायालय बिलासपुर के द्वारा 45 दिन के अंदर मध्य प्रदेश पुनर्वास नीति 1991 के तहत रोजगार प्रदान करने का आदेश पारित किया है। इससे यह प्रमाणित हो गया है कि कोल इंडिया पॉलिसी 2012 के स्थान पर राज्य के पुर्नवास नीति को लागू किया जाना संविधान सम्मत होगा।