अहिल्याबाई के प्रभाव व योगदान पर शिक्षाविदों ने रखें विचार

कोरबा। श्री अग्रसेन कन्या महाविद्यालय द्वारा लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की प्रशासनिक व्यवस्था, वर्तमान संदर्भ में उनकी प्रासंगिकता विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन संगोष्ठी में देशभर के विशेषज्ञों और शिक्षाविदों ने हिस्सा लिया।

उन्होंने समाज और प्रशासनिक संरचना पर अहिल्याबाई होल्कर के प्रभाव और उनके योगदान के संदर्भ में अपने विचार व्यक्त किये।


प्राचार्य डॉ. मनोज कुमार झा ने उद्घाटन सत्र का शुभारंभ करते हुए सभी अतिथियों का स्वागत किया। स्वागत भाषण में उन्होंने संगोष्ठी के आयोजन को महत्तवपूर्ण बताते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन छात्रों और शिक्षाविदों को ऐतिहासिक और प्रशासनिक दृष्टिकोण से जागरूक करती हैं।

संगोष्ठी के दूसरे दिन का प्रथम सत्र तकनीकी सत्र के रूप में रखा गया। जिसमें सीआईपीएस-आरएफ, सैन्य मनोवैज्ञानिक और वार स्ट्रेटेजिस्ट की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर का जीवन संघर्ष, भाषण का नहीं अपितु उनके आचरण से सीख लेने का है।

मगध विश्वविद्यालय, बोधगया, बिहार के मुख्य वक्ता डॉ. धर्मेन्द्र कुमार ने कहा कि भारतीय परम्परा में सद्विचार और सदाचरण को ही धर्म माना गया है, जिसमें ये दो गुण है वहीं राजा या शासक जनमानस को सुख पहुँचा सकता है।

इस अवसर पर शिक्षण समिति के अध्यक्ष सुनील जैन, सचिव पवन अग्रवाल, कोषाध्यक्ष पुरुषोत्तम गुप्ता तथा शिक्षण समिति के अन्य सदस्यों के साथ ही साथ आमंत्रित महाविद्यालयों के प्राचार्य, डॉ. शिखा शर्मा, डॉ.साधना खरे, डॉ.एन पी यादव, डॉ. डेजी कुजूर, डॉ प्रशांत बोपापुरकर, मृगेश यादव सहित अन्य उपस्थित रहे।