नहीं छोड़ पा रहे सराईपाली खदान का मोह जीएम चौहान

खदान में कोयले की अफरा-तफरी की शिकायत

कोरबा। भारत सरकार की मिनीरत्न कोल इंडिया की कंपनी एसईसीएल की मेगा इकाईयां छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में है और कोरबा एरिया की ही एक इकाई सराईपाली अपने उत्पादन से भी ज्यादा खदान में कोयले की अफरा-तफरी और ग्रेडों के नाम से मशहूर है, इसके अलावा अन्य वजहों से भी सुर्खियों में हैं यहाँ पर पदस्थ सब एरिया मैनेजर सुरेन्द्र सिंह चौहान वर्ष 2017 से पदस्थ है वो यहाँ हेड लैंड और रेवेन्यू बनकर आये थे फिर वर्ष 2019 में प्रमोट होकर मैनेजर बने फिर यही पदस्थ रहते 2020 में सब-एरिया भी बन गए लेकिन सराईपाली खदान में यह लगातार बने ही रहे।

हालिया वर्ष 2024 में ई-8 ग्रेड अर्थात जीएम में प्रमोट हुए तथा डब्ल्यूसीएल स्थानन्तरित भी होने आदेश आया परंतु सराईपाली माइन्स का मोह नहीं छोड़ पा रहे हैं। या यूं कहें कि सराईपाली खदान में आये दिन होने वाली अप्रत्यक्ष कारणों ने इन्हें रोके रखा है।


जानकारी के अनुसार जिले के भाजपा नेताओं ने कोयला मंत्री सहित कोल इंडिया और एसईसीएल के अधिकारियों को शिकायत भेजकर कहा है कि कोरबा एरिया क्षेत्रांतर्गत आने वाले सराईपाली माइंस में कोल ग्रेड के हेर फेर हो रही है साथ ही स्टीम कोल की आपूर्ति के नाम पर अवैधानिक कार्यों को अंजाम दिया जा रहा है।

वहीं खदान में बूम बेरियर बनने से पहले हजारों टन कोयले की चोरी हो या अच्छे कोयला को इन सीम करना हो या ग्रेड बदलकर कोल अर्थात माल देना हो ऐसे सभी अवैधानिक कार्यों को एसईसीएल प्रबंधन अनदेखी कर रहा है व अवैध कार्यों को अपनी सीधे देख रेख में बखूबी निभा रहे हैं।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि खदान के अंदर  वो ये सब खुलेआम हो रहा है व खदान क्षेत्र के बाहर अपने दो पार्टनरी फर्म से लेनदेन कराते हैं। इसी तरह एक और कांट्रेक्टर को करोड़ों रुपये का लाभ क्वांटिटी एडजेस्ट के नाम पर लाभ पहुंचा चुके हैं।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि एसईसीएल की सराईपाली माइंस में आये दिन हो रहे गुंडागर्दी पर शिकायत के बाद भी प्रबंधन कोई कार्यवाही नहीं कर रहा है।