अखिलेश सिंह दस्तावेज में नहीं था फ्लोरा मैक्स कंपनी का मालिक, टीम लीडरों के खातों से होता था लेन-देन

कोरबा । फ्लोरा मैक्स कंपनी में निवेश कर अपनी कमाई की राशि डूबा चुकी महिलाएं भले ही अब आर्थिक पथे शानी झेल रही हों, पर कंपनी के प्रमुख कर्ता- धर्ता रहे आरोपितों की लाइफ स्टाइल ही बदल गई है। कब तक जिन लोगों के पास मामूली नौकरी व रहने के लिए झोपड़ी था, वे अब आलीशान मकान बनवा रहे थे।

फ्लोरा मैक्स का नेटवर्क तीन चरण में तैयार किया गया था। पहले चरण में वह खुद, उसका भाई, भाभी व रिश्तेदार थे। दूसरे चरण में टापटेन लीडर तैयार किए गए थे, जो पूरी कंपनी का लेनदेन अपने व अपने रिश्तेदारों के खाते के माध्यम से किया करते थे।

अखिलेश ने चालाकी करते हुए कंपनी का कोई भी काम खुद के नाम पर नहीं कर रहा था। उसने अपने बैंक खाते का उपयोग नहीं किया, केवल नाम का वह डायरेक्टर था। इन सबके बावजूद पुलिस ने स्कैम का मास्टर माइंड अखिलेश को ही मानते हुए मुख्य आरोपित बनाया है। 110 करोड से भी अधिक की कंपनी के मालिक बनने के बाद भी वह इमलीडुग्गू में स्थित अपने वही पुराने मकान में निवासरत था। यही नहीं उसने अपने पुराने मकान को भी नहीं छोड़ा था।


केवल एक कार उसने घूमने के लिए खरीदा था। वहीं पेट्रोल पंप में काम करने वाला मयाराम साहू कंपनी का कैशियर बनने के बाद अब गांव में आलीशान मकान का निर्माण करा लिया है। सबसे पहले उसकी पत्नी इस कंपनी से जुड़ी और बाद में मयाराम नौकरी छोड़ कर कंपनी में बतौर कैशियर काम करने लगा। एक लीडर ओमेश्वरी नायडू पर 45 लाख लेकर भागने का ठीकरा अखिलेश ने पुलिस से पूछताछ के दौरान फोड़ा है।

इस आरोप को वह बेबुनियाद बता रही। उसकी माने तो सारे पैसा अखिलेश ने रख लिए हैं और अब उसे बलि का बकरा बनाया जा रहा। यह तो पुलिस जांच में स्पष्ट होगा कि किसने कितने रुपये की ठगी की है, पर एक बात साफ है जितने भी शीर्ष स्तर पर इस कंपनी में सक्रिय रहे, उनकी लाइफ स्टाइल देखते ही देखते बदल गई।

धमका रहे फाइनेंस कंपनी के गुर्गे

अब तक जांच में 60 से अधिक बैंक व निजी फाइनेंस कंपनियों के नाम सामने आ चुके हैं। जहां से महिलाओं को कंपनी के लोगों ने ही 30-30 हजार रुपये लोन दिलाने में मदद की और पूरी राशि खुद रख लिए। इस पूरी ठगी के दौरान इस बात का ध्यान रखा गया और किसी भी महिला से 30 हजार से ज्यादा राशि जमा नहीं कराई गई। अधिक राशि जमा कराने के लिए एक ओर सदस्य जोड़ने का नियम बनाया गया था। यही वजह है कि महिलाएं जुड़ने के बाद चिरपरिचित व रिश्तेदारों के नाम से भी राशि जमा कर दिए थे। अब निजी फाइनेंस कंपनी के गुर्गे लोन लेने वाली महिलाओं को धमकी दे रहे हैं।