कोयला खदान के लिए मलगांव, अमगांव व सुआभोड़ी को 6 माह में उजाड़ देगी कंपनी

कोरबा में एसईसीएल की दीपका कोयला खदान के लिए ग्राम सुआभोड़ी को आने वाले 6 माह के भीतर खाली करा लिया जाएगा। इसकी जानकारी जिला प्रशासन की ओर से दी गई है। बताया गया है कि जिस व्यक्ति को भी विस्थापन को लेकर कोई दावा आपत्ति प्रस्तुत करनी है वह उपस्थित होकर प्रशासन के पास अपना दावा आपत्ति प्रस्तुत करे। निर्धारित अवधि के बाद किसी भी प्रकार की दावा आपत्ति मान्य नहीं होगी।


गौरतलब है कि एसईसीएल (SECL) प्रबंधन ने दीपका खदान विस्तार के लिए वर्ष 1999 में ग्राम पंचायत चैनपुर के आश्रित ग्राम सुआभोड़ी की जमीन का अधिग्रहण किया था। तब से यह प्रक्रिया चल रही है। पूर्व में प्रबंधन ने इस जमीन को खाली नहीं कराया था, अब प्रबंधन को कोयला खनन के लिए इस गांव के जमीन की जरूरत है। इसके लिए प्रबंधन जिला प्रशासन से सहयोग मांग रहा है।

पूर्व में आयोजित कई बैठकों में एसईसीएल और कोल इंडिया (Coal India) के अफसर जमीन की मांग कर चुके हैं ताकि कोयला खनन की प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित किया जा सके।


इसके साथ-साथ कोयला कंपनी की योजना मलगांव और अमगांव को भी पूर्ण रूप से खाली कराने की है ताकि कोयले की जरूरत को पूरा किया जा सके। इस संबंध में सोमवार को जिला प्रशासन की ओर से एक सूचना जारी की गई। इसमें बताया गया कि ग्राम मलगांव की जमीन का अधिग्रहण एसईसीएल प्रबंधन ने 23 फरवरी 1999 को किया था। इसके आश्रित ग्राम झिंगटपुर का भी अधिग्रहण उसी दिन किया गया था।


ग्रामीण नौकरी, पुनर्वास और मुआवजे की मांग को लेकर अड़े


कंपनी ने दीपका खदान के लिए अमगांव की जमीन को भी अर्जित किया है। मगर वर्तमान में कंपनी का इस पर कब्जा नहीं है। ग्रामीण नौकरी, पुनर्वास और मुआवजे की मांग को लेकर अड़े हुए हैं और वे अपनी एक इंच भी जमीन कोयला कंपनी को देने के लिए तैयार नहीं है। इसे लेकर कई साल से आंदोलन कर रहे हैं। अब प्रशासन के रूख से भूविस्थापितों के साथ तनातनी बढ़ने की आशंका है।