असुरक्षित कार्यप्रणाली व प्रबंधन की घोर लापरवाही से घटना में गई जान
कोरबा । एसईसीएल कुसमुंडा प्रबंधन की कई तरह की खामियों की वजह से ओव्हर बर्डन में लैंड स्लाइड हुआ और सहायक प्रबंधक (माइनिंग) की मौत हो गई। महाप्रबंधक राजीव सिंह ने अपनी गलतियों को छिपाने के लिए लिखित तौर पर जितेन्द्र नागरकर पर ही मौत की जिम्मेदारी थोप दी थी। कंपनी सुरक्षा समिति, बिलासपुर के सदस्य बी धर्माराव और सहयोगी बी बी विश्वाल क्षेत्रीय सुरक्षा अधिकारी, आईडी साव वरिष्ठ ओव्हरमैन की जांच रिपोर्ट से इसका खुलासा हुआ है। उक्त जांच प्रतिवेदन सीएमडी को सौंपा गया है।
इस तरह हुई थी घटना, चारों तरफ ओबी था डम्प
27 जुलाई को गोदावरी कोल फेस के इंचार्ज जितेंद्र विनायक नागरकर अपने साथी ओव्हरमैन एवं माईनिंग सरदार के साथ गोदावरी कोल फेस के दक्षिण दिशा में जहां सरफेस माईनर चल रहा था, वहां कार्य करा रहे थे। लगभग 2:30 बजे तेज बारिश शुरू हो गई और करीब 3 घंटे तक हुई। नागरकर ने फेस में काम बंद कराया और सभी मशीनों को सरफेस माईनर सहित ऊपर की तरफ सुरक्षित स्थान पर पहुंचवा दिया तथा अपने साथी ओव्हरमैन, माईनिंग सरदार व प्राईवेट कंपनी एस.एस.एस.टी.वी. व जय अंबे कंपनी के सुपरवाईजर को लेकर रेस्ट सेल्टर में आ गए, जो नीचे सम्प के पास रखा हुआ था। शाम लगभग 4:30 बजे पानी का बहाव की वजह से रेस्ट सेल्टर सम्प में डूब गया। नागरकर एवं उनके साथी रेस्ट सेल्टर से कूदकर बाहर आ गए। चूंकि ऊपर की तरफ से ही पानी आ रहा था और चारों तरफ ओ.बी. डंप किया हुआ था और दूसरा कोई बचाव का रास्ता नहीं था इसलिए शायद मजबूरी में सभी लोग धारा के विपरित दिशा में एक-दूसरे का हाथ पकडक़र मानव श्रंृखला बनाकर निकलने का प्रयास करने लगे जिसमें नागरकर का पांव फिसल गया और एक साथी के साथ सम्प में समा गए। जिस साथी का हाथ नागरकर ने पकड़ रखा था उसे बाद में बचा लिया गया लेकिन नागरकर तेज बहाव के कारण सम्प में काफी दूर जाकर डूब गए।
घटनास्थल पर मिली कई खामियां और उल्लंघन
जहां कार्य चल रहा था वो खान का सबसे गहरा भाग था, पूरे खदान का पानी वहां जमा हो रहा था। उस स्थल पर पर्याप्त पानी निकासी की व्यवस्था नहीं थी। ह्यूम पाईप के भरोसे पानी निकासी किया जा रहा था। ह्यूम पाईप जाम हो गया और पाईप के उपर से पानी बहने लगा, जिसकी वजह से रेस्ट सेल्टर (गुमटी) सम्प में बह गया। सीएमआर 101 (1) का स्पष्ट उलंघन करते हुए डंपिंग के बगल में हॉल रोड बनाई गई थी जिसकी चौड़ाई मानकता के हिसाब से नहीं थी। डम्प के ऊपर में पानी जमा हो रहा था फलस्वरूप जमा पानी भी तेजी के साथ नीचे गोदावरी कोल फेस के कार्य क्षेत्र के पास कीचड़ के साथ जाने लगा जिसकी वजह से नागरकर एवं साथियों को बाहर आने में सुरक्षित स्थान तक दिक्कत हो रही थी। सीएमआर 109 (1) का स्पष्ट उलंघन करते हुए एक ही हॉल रोड से लोडेड व अनलोडेड टिपर का परिचालन किया जा रहा था, जिसकी चौड़ाई भी मानकता के हिसाब से सही नहीं थी। स्टीप ग्रेडिएन्ट होने की वजह से पानी तेजी से नीचे की ओर आ रहा था। कार्यक्षेत्र में कार्य कर रहे कर्मचारियों का बाहर निकालने या ऊपर आने का कोई दूसरा रास्ता नहीं था, इसलिए सभी कर्मचारी उसमें फंस गए।
डम्प स्लाईड के खतरे के बीच काम करा रहे
सम्प के बगल में कार्य चल रहा था, जहां सरफेस माइनर चल रहा था वहां हाई वॉल (ऊंची दीवार) बन गया है। करीब 130 से 140 फीट ऊपर से बोल्डर या पत्थर इत्यादि गिरने से नीचे काम करने वाले कर्मचारियों की जान खतरे में पड़ सकती है साथ ही इससे मशीनों को भी नुकसान पहुंच सकता है। सम्प एरिया में डम्पिंग हो रही थी, जिससे डम्प स्लाईड होने का खतरा हमेशा बना रहता है फिर भी सम्प में डम्प किया जा रहा था। गोदावरी कोल फेस के तीनों तरफ डम्प किया गया है, इससे डम्प स्लाईड होने का खतरा रहता है। इस तरह की असुरक्षित कार्य प्रणाली में कार्य कराया जा रहा था। दुर्घटनास्थल का निरीक्षण करने से स्पष्ट पता चलता है कि मानसून प्रिपरेशन के तहत कोई तैयारी नहीं की गयी थी।
निरीक्षण दल ने दिया सुझाव
गोदावरी कोल फेस में 250 से 300 मीटर तक जमीन अधिकृत है इसलिए ऊपर से सही तरीके से बेंच की ऊंचाई व चौड़ाई को मेंन्टेन करते हुए खनन कार्य किया जाना चाहिए। खदान में सबसे निचले हिस्से में कार्य करने से पूर्व पानी निकासी एवं नियंत्रण करने के पर्याप्त उपाय व व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जानी चाहिए। वन-वे ट्रैफिक रूल को अपनाया जाना चाहिए। खनन क्षेत्र के पास में ही ओबी डम्प नहीं किया जाना चाहिए, डम्प स्लाईड का खतरा हो सकता है। सीएमआर 108 (3) का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। रेस्ट शेल्टर को सम्प के पास स्थापित नहीं किया जाना चाहिए। सम्प के करीब कार्य करने से बचना चाहिए, सरफेस माइनर जैसे कीमती और भारी मशीनों के डूबने का खतरा हो सकता है।
4 साल पहले हुई दुर्घटना से नहीं लिया सबक
जुलाई 2020 में इसी गोदावरी कोल फेस में ठीक इसी तरह ओव्हर बर्डन के मलबे के साथ बारिश का पानी तेजी से सम्प की तरफ आया था और इसी तरह दुर्घटना हुई थी जिसमें एक ठेका श्रमिक सम्प में बह गया था। 27 जुलाई को हुई घटना इस दुर्घटना की पुनरावृत्ति है। प्रबंधन ने वर्ष 2020 में दुर्घटना से कोई सीख नहीं ली, अन्यथा इस तरह की घटना को रोका जा सकता था। सुरक्षा के उपायों को अपनाकर ही कार्य किया जाना चाहिए। सुरक्षा के नियमों/उपायों की अनदेखी इस घटना का मूल कारण है जिसके कारण जितेंद्र को अपनी जान गंवानी पड़ी।
Editor – Niraj Jaiswal
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