खदान में स्लोप राडार तकनीक फिर भी दुर्घटना में गई जान

कोरबा: कोयला खदानों में स्लाेप स्टैबिलिटी राडार लगाए जाने से संपूर्ण खदान व ओबी डंप इसके दायरे में आ जाता है। यह अत्याधुनिक तंत्र सभी तरह के मौसम चाहे धूल भरी आंधी हो या तेज वर्षा का, सफलता पूर्वक काम करने का दावा किया जाता है। इस दावे पर कुसमुंडा खदान में घटित हादसे पर प्रश्न चिन्ह खड़ा कर दिया है। वजह यह है कि कुसमुंडा खदान में करोड़ों रूपये खर्च कर यह आधुनिक यंत्र लगाया गया है। इसके बाद भी ओबी में स्लाइडिंग की घटना हो गई।

कोल इंडिया से संबद्ध कंपनी साऊथ इस्टर्न काेलफिल्ड इंडिया लिमिटेट एसइसीएल की कुसमुंडा कोयला खदान में शनिवार की दोपहर तेज वर्षा की वजह से अचानक गोदावरी फेस में डंपिंग यार्ड में स्लाइडिंग हुई और पानी के साथ मलवे की सैलाब की चपेट में सहायक प्रबंधक जितेंद्र नागरकर समेत छह लोग आ गए। चार तो सुरक्षित बच गए पर नागरकर की मौत हो गई और माइनिंग सरदार धरमसिंह घायल हो गया। यहां बताना होगा कि जमीन की कमी की वजह से अधिकतर खदानाें में बड़े-बड़े ओवरबर्डन के पहाड़ बन गए हैं। इनसे न सिर्फ खदानाें बल्कि आसपास की बस्तियाें व सड़क मार्गाें काे भी खतरा बना रहता है।

इस स्थिति काे देखते हुए सभी खदानाें और ओबी डंप काे स्लाेप स्टैब्लिटी रडार की जद में लाने पर विचार वर्ष 2021 में हुई स्टैंडिंग कमेटी आन काेल माइंस सेफ्टी एंड रेस्क्यू की बैठक में लिया गया था। इसके बाद यह अत्याधुनिक तकनीक कोल इंडिया के कोयला खदानों में लगाया गया है। इस तंत्र के ओबी के धंसने से पहले सूचना मिलने का दावा किया गया था। अब सवाल यह उठता है कि कुसमुंडा खदान के ओबी में अधिक पानी भरने से स्लाइडिंग के साथ मलवे का जल सैलबा फूटा तब क्या राडार से खतरे की सूचना मिली थी। यदि नहीं मिली थी तो क्या इस सिस्टम को असफल मान लिया जाए। यदि संकेत मिले थे तो फिर समय रहते सहायक प्रबंधक नागरकर की टीम को निरीक्षण में जाने से पहले क्याें नहीं रोका गया। ऐसे कई सवाल है जिसका जवाब प्रबंधन के पास नहीं है।