सरकारी नौकरी नहीं मिली तो खुद का रोजगार खड़ा किया, अब गांव में बना रहे हैं ब्रेड-बिस्किट           

पीएम रोजगार सृजन योजना से 9.90 लाख रुपए का वित्त पोषण, बेकरी शुरू कर आकाश डिक्सेना ने संवारी अपनी राह

कोरबा। सरकारी नौकरी की तैयारी में कई साल लगाने के बाद भी जब सफलता नहीं मिली तो पाली विकासखंड के मुंगाडीह निवासी आकाश कुमार डिक्सेना ने निराश होने के बजाय स्वरोजगार का रास्ता चुना। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना का सहारा लेकर उन्होंने गांव में बेकरी उद्योग शुरू किया। आज ब्रेड, क्रीम रोल, बिस्किट समेत विभिन्न बेकरी उत्पाद तैयार कर वे नियमित आमदनी अर्जित कर रहे हैं और आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रहे हैं।

किसान परिवार से आने वाले आकाश ने एमए (अंग्रेजी एवं संस्कृत) और बीएड की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के बाद सरकारी नौकरी के लिए कई वर्षों तक तैयारी की। इसी दौरान उन्होंने एक निजी कॉलेज में सहायक प्राध्यापक के रूप में भी काम किया, लेकिन कम वेतन के कारण यह काम लंबे समय तक जारी नहीं रख सके।

इसी बीच अखबार के माध्यम से उन्हें प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना की जानकारी मिली। योजना की जानकारी लेने के बाद उन्होंने नौकरी की तलाश के बजाय अपना व्यवसाय शुरू करने का निर्णय लिया। उन्होंने बेकरी उद्योग के लिए करीब 11 लाख रुपए का प्रोजेक्ट तैयार किया, जिसे बैंक से 9.90 लाख रुपए का वित्त पोषण मिला। इसके बाद उन्होंने अपने गांव मुंगाडीह में बेकरी की शुरुआत की।

गांव में ही तैयार हो रहे बेकरी उत्पाद
आकाश की बेकरी में ब्रेड, क्रीम रोल, बिस्किट सहित अन्य उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। स्थानीय बाजार में इन उत्पादों की बिक्री हो रही है और ग्रामीणों से भी उन्हें अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। व्यवसाय ने उन्हें नियमित आमदनी का जरिया दिया है। साथ ही बेकरी के काम से गांव के कुछ बेरोजगार युवाओं को भी रोजगार मिला है। माता-पिता भी व्यवसाय में उनका सहयोग कर रहे हैं।

आकाश बताते हैं कि प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना ने उनके लिए स्वरोजगार का रास्ता खोला। वे बैंक ऋण की करीब 15,300 रुपए मासिक किस्त नियमित रूप से चुका रहे हैं। उनके मुताबिक खुद का व्यवसाय शुरू करने से उन्हें आत्मनिर्भर बनने के साथ अपने गांव में ही काम करने का अवसर मिला है।

आकाश की कहानी बताती है कि नौकरी की तलाश के साथ स्वरोजगार भी युवाओं के लिए आजीविका का एक रास्ता बन सकता है। योजना के माध्यम से मिले वित्तीय सहयोग का उपयोग कर उन्होंने अपने हुनर और मेहनत को व्यवसाय में बदला और अब खुद के साथ दूसरों के लिए भी रोजगार का माध्यम बन रहे हैं।