जेलों में बंद किशोरों की पहचान के लिये हुई कार्यशाला

कोरबा । राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशों के अनुपालन में एडीआर भवन जिला न्यायालय परिसर में किशोर बंदियों से संबंधित युवाओं को पुन: स्थापित करना – जेलों में बंद किशोरों की पहचान करने और विधिक सहायता प्रदान करने के लिये अखिल भारतीय अभियान – 2024 के संबंध में कार्यशाला का आयोजन सत्येन्द्र कुमार साहू, माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के मार्गदर्शन में किया गया।


प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने कहा कि बाल सक्षम नीति के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु बाल श्रमिक अपशिष्ट, संग्राहक, भिक्षावृत्ति, मादक द्रव्यों के शिकार बच्चों के सर्वेक्षण की कार्यवाही के लिये संबंधित विभाग से जानकारी प्रदान कर सकते है, जिनके अध्यक्ष जिला कलेक्टर विभाग से जानकारी प्राप्त किया जा सकता है या मिलना चाहिये। यदि अपराधी नाबालिक है तो उसे चिन्हांकित करे ताकि कोर्ट उस अपराधी के उम्र (नाबालिक) को देखने हुये उसकी सजा माफ कर सकती है। अज्ञानतावश या अनजाने में हो गई अपराध के लिये या कोई प्रकार का दावा न कर सके इसलिये चिन्हांकित कर बताये कि वह किशोर है या नाबालिक है, ताकि उसके साथ कोर्ट उचित न्याय कर सकें। किशोर या नाबालिक के साथ बात बरताव को सालिनता से पेश आये और यदि वह किशोर जेल में हो उसे सही न्याय मिलना आवश्यक है जिसके लिये हमें एक कदम बढ़ाना जरूरी है।  किशोर या नाबालिक के साथ सही बरताव कर उसे पुर्नवास कराने का प्रयासरत हम हमेशा करेंगे।


सचिव कु. डिम्पल ने बताया कि अभियान का उद्देश्य वर्तमान में जेल में बंद व्यक्तियों की पहचान करना होगा, जो अपराध घटित होने की तिथि पर नाबालिक विचारधीन बंदी या दोषी होने का दावा करते हैं। नेहा वर्मा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, संदीप बिसेन बाल परीवीक्षा अधिकारी, डॉ. नागज्योति राठौर, न्यायाधीश जयदीप गर्ग, विशेष न्यायाधीश, एस्ट्रोसिजिट, डॉ. ममता भोजवानी, जिला अपर सत्र न्यायाधीश, पॉक्सो, सीमा प्रताप चन्द्रा, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोरबा, प्रतिक्षा अग्रवाल, व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ श्रेणी, मंजीत जांगडे, ऋचा यादव, लवकुमार लहरे, व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ श्रेणी,  जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष गणेश कुलदीप, सचिव नूतन सिंह, थाना प्रभारी आदि भी उपस्थित रहे।