कोरबा। SECL की खदानों में अब ईवी टिपर के माध्यम से कोयले की ढुलाई की जाएगी। कोल कंपनी ने हाल ही में जारी टेंडर में 20 फीसदी इलेक्ट्रिक एवं सीएनजी वाहनों को शामिल करना अनिवार्य किया है। 8 मई को जारी इस टेंडर के साथ एसईसीएल में ईंधन संरक्षण को कॉर्पोरेट जिम्मेदारी का हिस्सा बनाया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के चलते देश में पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने का आह्वान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किए जाने के बाद कोल इंडिया लिमिटेड ने अपनी सभी अनुषंगी कंपनियों के लिए ईवी टिपर की तैनाती और आधिकारिक कार पुलिंग को अनिवार्य करने संबंधी गाइडलाइन जारी की है।
एसईसीएल की ओर से जारी नए टेंडर में कोयला परिवहन के लिए इलेक्ट्रिक एवं सीएनजी वाहनों को प्राथमिकता देने की शर्त रखी गई है।
इसके तहत मौजूदा और आगामी कोयला ढुलाई कार्यों में ईवी टिपर का उपयोग किया जाएगा।
कोल इंडिया ने विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए हैं कि निरीक्षण एवं अन्य विभागीय कार्यों के दौरान डीजल-पेट्रोल वाहनों का उपयोग साझा रूप से किया जाए तथा प्राथमिकता ईवी वाहनों को दी जाए। अन्य वाहनों को कॉमन पूल में रखने की व्यवस्था भी लागू की जाएगी।
जानकारी के अनुसार अमेरिका-ईरान के बीच तनाव और युद्ध जैसी स्थिति के कारण डीजल की सप्लाई चैन प्रभावित हुई है।
इसका असर कोयला खदानों में कार्यरत ठेका कंपनियों की मशीनरी और भारी वाहनों के संचालन पर पड़ रहा है।
हालांकि वर्तमान में जिले में तेल संकट की स्थिति नहीं है, लेकिन भविष्य में संभावित डीजल किल्लत से निपटने के लिए एसईसीएल ने ईवी वाहनों के उपयोग पर जोर देना शुरू कर दिया है।
Editor – Niraj Jaiswal
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