बांकीमोंगरा नगरपालिका की खरीदी पर उठे सवाल

RTI में बैंक स्टेटमेंट, कैशबुक और बिल-वाउचर की जानकारी नहीं मिलने का आरोप; विशेष ऑडिट के लिए महालेखाकार से शिकायत की तैयारी

कोरबा। जिले की नवगठित नगर पालिका परिषद बांकीमोंगरा में वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान हुई खरीदी और वित्तीय लेनदेन को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

नगरपालिका की पीआईसी बैठक में विभिन्न सामग्रियों की खरीदी के प्रस्तावों को मंजूरी दिए जाने के बाद अब दरों में अंतर, खरीदी प्रक्रिया और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सबसे ज्यादा सवाल स्वच्छता शाखा के लिए 10-10 मैनुअल रिक्शों की खरीदी को लेकर उठ रहे हैं।

उपलब्ध प्रस्ताव विवरण के अनुसार, एक फर्म से 10 रिक्शों की खरीदी के लिए 5.23 लाख रुपये और दूसरी फर्म से इतनी ही संख्या में रिक्शों के लिए 2.88 लाख रुपये की दर दर्ज है। दोनों प्रस्तावों को स्वीकृति दिए जाने की बात सामने आई है।

इधर, आरटीआई कार्यकर्ता जितेंद्र कुमार साहू ने आरोप लगाया है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के बैंक स्टेटमेंट, कैशबुक और खर्चों के बिल-वाउचर की प्रमाणित प्रतियां मांगे जाने के बावजूद उन्हें संतोषजनक जानकारी नहीं मिली। इस संबंध में प्रथम अपील के बाद छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील प्रस्तुत करने की बात कही गई है। अब आवेदक प्रधान महालेखाकार, लेखा संपरीक्षा, छत्तीसगढ़ से विशेष ऑडिट कराने की मांग करने की तैयारी में हैं।

10-10 रिक्शों की खरीदी, लेकिन दरों में 2.35 लाख का अंतर

नगरपालिका की पीआईसी बैठक में स्वच्छता शाखा के लिए 10-10 मैनुअल रिक्शे खरीदने के दो प्रस्ताव रखे गए। उपलब्ध विवरण के अनुसार, एमके इंटरप्राइजेस ने 10 रिक्शों के लिए 5 लाख 23 हजार रुपये की न्यूनतम दर प्रस्तुत की, जबकि श्री सालासार इंटरप्राइजेस की ओर से इतनी ही संख्या में रिक्शों की दर 2 लाख 88 हजार रुपये दर्ज की गई।

दोनों प्रस्तावों के बीच 2 लाख 35 हजार रुपये का अंतर है। इसी अंतर को लेकर सवाल उठ रहा है कि जब एक फर्म की दर काफी कम थी, तो दूसरी फर्म से अधिक कीमत पर रिक्शे खरीदने का निर्णय किन आधारों पर लिया गया? क्या दोनों फर्मों के रिक्शों की गुणवत्ता, तकनीकी विशेषताओं और अन्य शर्तों में कोई अंतर था? क्या तुलनात्मक परीक्षण और दरों के औचित्य का आकलन किया गया था?

इन सवालों का जवाब संबंधित खरीदी फाइलों, तकनीकी विवरणों, दरों के तुलनात्मक पत्रक और स्वीकृति आदेशों की जांच से ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल केवल दरों के अंतर के आधार पर किसी अनियमितता की पुष्टि नहीं की जा सकती।

अन्य खरीदी प्रस्तावों में भी लाखों का खर्च

नगरपालिका की पीआईसी बैठक के उपलब्ध एजेंडे में जेम पोर्टल के माध्यम से विभिन्न सामग्रियों और उपकरणों की खरीदी से संबंधित प्रस्ताव भी शामिल हैं। इनमें निकाय कर्मचारियों और स्वच्छता दीदियों के लिए 208 रेनकोट की खरीदी हेतु 2 लाख 36 हजार 4 रुपये तथा 208 जोड़ी जूतों के लिए 1 लाख 80 हजार रुपये की दर का उल्लेख है।

इसके अलावा एक फीकल स्लज वैक्यूम एम्प्टीयर मशीन के लिए 4 लाख 99 हजार 999 रुपये, एक कोर कटिंग मशीन के लिए 1 लाख 49 हजार 980 रुपये, 34 आयरन बेंच के लिए 4 लाख 11 हजार 600 रुपये और जल शाखा के लिए एक हॉपर टिप्पर वाहन की खरीदी हेतु 12 लाख 95 हजार रुपये की दर दर्ज है।

वार्ड क्रमांक 20 में सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए छोटे भवन और चौपाल यानी चबूतरा निर्माण के लिए 8.54 लाख रुपये की लागत का प्रस्ताव भी बैठक में शामिल था।

इन प्रस्तावों को लेकर मुख्य सवाल यह है कि खरीदी की आवश्यकता का आकलन कैसे किया गया, दरों का निर्धारण किन आधारों पर हुआ और लागू नियमों के अनुसार आवश्यक प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृतियां ली गईं या नहीं। इसका आकलन संबंधित दस्तावेजों की जांच से किया जा सकता है।

RTI में बैंक खातों और खर्चों के दस्तावेज मांगे

आरटीआई कार्यकर्ता जितेंद्र कुमार साहू के अनुसार, उन्होंने नगरपालिका परिषद से वित्तीय वर्ष 2025-26 के वित्तीय लेनदेन से जुड़े महत्वपूर्ण अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां मांगी हैं। इनमें एचडीएफसी बैंक, उत्कर्ष बैंक और इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक सहित संबंधित खातों के बैंक स्टेटमेंट, मुख्य कैशबुक, सहायक कैशबुक तथा निकाय के खर्चों से जुड़े बिल और वाउचर शामिल हैं।

आवेदक के मुताबिक, 8 जून 2026 को सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 6(3) के तहत आवेदन जन सूचना अधिकारी एवं लेखा अधिकारी सुजीत कुमार मेहता के पास प्रस्तुत किया गया था। निर्धारित अवधि में जानकारी नहीं मिलने और कथित रूप से अधूरी अथवा भ्रामक जानकारी दिए जाने के विरोध में उन्होंने मुख्य नगरपालिका अधिकारी के समक्ष धारा 19(1) के तहत प्रथम अपील दायर की।

आवेदक का कहना है कि प्रथम अपील का भी संतोषजनक निराकरण नहीं होने पर उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग, रायपुर के समक्ष धारा 19(3) के तहत द्वितीय अपील प्रस्तुत की है।

विशेष ऑडिट के लिए महालेखाकार से करेंगे शिकायत

आरटीआई कार्यकर्ता जितेंद्र कुमार साहू ने कहा है कि नगरपालिका की खरीदी और वित्तीय लेनदेन को लेकर उठ रहे सवालों के मद्देनजर अब प्रधान महालेखाकार, लेखा संपरीक्षा, छत्तीसगढ़ को शिकायत सौंपकर विशेष ऑडिट कराने की मांग की जाएगी।

उनके अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 के समस्त आय-व्यय, बैंक खातों, कैशबुक और संबंधित अभिलेखों की जांच से वित्तीय लेनदेन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। उन्होंने सार्वजनिक धन के उपयोग में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र जांच की आवश्यकता जताई है।

दस्तावेजों की जांच से स्पष्ट होगी स्थिति

नगरपालिका की खरीदी को लेकर उठे सवालों के बीच अब निगाहें संबंधित दस्तावेजों और अधिकारियों के पक्ष पर हैं। यह जांच का विषय है कि सभी प्रस्तावों में लागू भंडार क्रय नियमों का पालन हुआ या नहीं, आवश्यक स्वीकृतियां ली गईं या नहीं और खरीदी गई सामग्री की आपूर्ति, गुणवत्ता तथा भुगतान के अभिलेख उपलब्ध हैं या नहीं।

नगरपालिका के जिम्मेदार अधिकारियों का दावा है कि खरीदी और अन्य कार्य नियमों के तहत किए गए हैं। ऐसे में निष्पक्ष जांच से ही आरोपों की वास्तविकता और खरीदी प्रक्रिया की वैधानिकता स्पष्ट हो सकेगी।