हरदीबाजार में सरकारी भवनों पर बुलडोजर से भड़का आक्रोश

सीजीएम कार्यालय में तालाबंदी, जमीन पर बैठाकर रखीं मांगें;ग्रामीण बोले- समस्याएं सुलझेंगी तभी देंगे जमीन

कोरबा। हरदीबाजार में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, आंगनबाड़ी, छात्रावास और पटवारी कार्यालय सहित तीन शासकीय भवनों को तोड़े जाने के बाद ग्रामीणों का आक्रोश सड़क पर उतर आया। विरोध में हरदीबाजार के व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठान बंद रखे। इसके बाद कटघोरा विधायक प्रेमचंद पटेल के नेतृत्व में ग्रामीणों ने एसईसीएल कार्यालय में तालाबंदी कर जमकर नारेबाजी की।

हरदीबाजार, सराईसिंगार, रेकी सहित आसपास के गांवों से सैकड़ों ग्रामीण शुक्रवार को दीपका स्थित सीजीएम कार्यालय पहुंचे। सुबह करीब 9 बजे कार्यालय के मुख्य गेट पर तालाबंदी कर ग्रामीणों ने धरना शुरू कर दिया। प्रदर्शन दिनभर जारी रहा और कार्यालय परिसर में आवागमन प्रभावित रहा। विधायक प्रेमचंद पटेल भी ग्रामीणों के साथ गेट पर धरने पर बैठे रहे।

प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा में तैनात सीआईएसएफ जवानों द्वारा एक महिला से कथित धक्का-मुक्की किए जाने की जानकारी सामने आने के बाद माहौल और गरमा गया।

ग्रामीणों ने एसईसीएल एवं जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। स्थिति को देखते हुए बड़ी संख्या में सीआईएसएफ जवान और पुलिस बल तैनात किया गया।

काफी देर तक चले हंगामे और समझाइश के बाद दीपका क्षेत्र के महाप्रबंधक अशोक कुमार अधिकारियों के साथ ग्रामीणों के बीच पहुंचे। ग्रामीणों ने उन्हें जमीन पर बैठाकर अपनी मांगें रखीं। ग्रामीणों ने शत-प्रतिशत मुआवजा, प्रभावित परिवारों को रोजगार, पुनर्वास एवं उचित बसाहट तथा स्वास्थ्य केंद्र में तत्काल डॉक्टरों की व्यवस्था की मांग की।

गांव आकर बात करो, तभी देंगे जमीन
महाप्रबंधक अशोक कुमार ने ग्रामीणों की मांगों को उच्च स्तर से जुड़ा बताते हुए कहा कि इनका समाधान उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है। उन्होंने बिलासपुर स्थित एसईसीएल मुख्यालय में त्रिपक्षीय वार्ता आयोजित कर समस्याओं का समाधान निकालने का प्रस्ताव रखा।

ग्रामीणों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। विधायक प्रेमचंद पटेल और सरपंच लोकेश्वर कंवर की मौजूदगी में ग्रामीणों ने कहा कि जमीन अधिग्रहण से पहले एसईसीएल और प्रशासन गांव में आकर बैठक करे और प्रभावितों की समस्याएं सुने। मांगें पूरी होने के बाद ही जमीन देने पर विचार किया जाएगा।

जनहित से कोई समझौता नहीं’
विधायक प्रेमचंद पटेल ने कहा कि जनता ने उन्हें अपना प्रतिनिधि चुना है और जनहित के मुद्दों पर वे हर स्तर पर संघर्ष करेंगे। उन्होंने कहा कि अस्पताल, आंगनबाड़ी और छात्रावास जैसे भवनों को तोड़ने की इतनी जल्दबाजी क्यों की गई, इसका जवाब एसईसीएल और प्रशासन को देना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोगों की समस्याओं के प्रति संवेदनशीलता जरूरी है। मांगों का समाधान नहीं हुआ तो आगे भी आंदोलन किया जाएगा।

शासकीय भवनों को तोड़े जाने के बाद शुरू हुआ विरोध अब जमीन अधिग्रहण, रोजगार, मुआवजा और पुनर्वास के मुद्दों से जुड़ गया है। ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े हैं, वहीं एसईसीएल प्रबंधन के सामने आंदोलन को समाप्त कराने और प्रभावितों के साथ सहमति बनाने की चुनौती है।