नेताओं की तकदीर बदली, पर अमहवा की नहीं: दो उफनती नदियों के बीच हर बारिश में कैद हो जाता है पूरा गांव

पुल और सड़क के अभाव में थम जाती है जिंदगी, ग्रामीणों ने दी चुनाव बहिष्कार की चेतावनी; DMF समेत विकास योजनाओं पर उठे सवाल

कोरबा/पोड़ी-उपरोड़ा।लोकतंत्र में जनता अपने वोट से नेताओं की तकदीर बदलती है, लेकिन कोरबा जिले के पोड़ी-उपरोड़ा विकासखंड के अमहवा गांव के लोगों का कहना है कि उनकी किस्मत आज भी नहीं बदली। हर चुनाव में विकास के वादे किए गए, सांसद और विधायक बदले, सरकारें भी बदलती रहीं, लेकिन गांव की सबसे बड़ी जरूरत पुल और सड़क आज भी अधूरी है। नतीजा यह है कि हर बरसात में पूरा गांव दो उफनती नदियों के बीच कैद होकर रह जाता है।

हर मानसून में कट जाता है संपर्क
जिला मुख्यालय से लगभग 80 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत पचरा के आश्रित गांव अमहवा के दोनों ओर बहने वाली कटोरी नदी और तान नदी बारिश के दिनों में उफान पर आ जाती हैं। पानी बढ़ते ही गांव का बाहरी दुनिया से संपर्क पूरी तरह टूट जाता है। ग्रामीण कई दिनों तक गांव में ही फंसे रहने को मजबूर हो जाते हैं, क्योंकि न वहां पक्का पुल है और न सुरक्षित सड़क।

जोखिम उठाना बनी मजबूरी
ग्रामीणों का कहना है कि राशन, दवा, बाजार या अन्य जरूरी काम के लिए उन्हें उफनती नदी पार करनी पड़ती है। कई बार घंटों पानी उतरने का इंतजार करना पड़ता है, लेकिन मजबूरी में जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है।

बच्चों की पढ़ाई भी होती है प्रभावित
अमहवा के बच्चों को पढ़ाई के लिए करीब 8 किलोमीटर दूर जटगा जाना पड़ता है। बरसात शुरू होते ही स्कूल जाने का रास्ता बंद हो जाता है। कई बच्चे दिनों तक स्कूल नहीं पहुंच पाते, जबकि कुछ अपनी पढ़ाई बचाने के लिए जान जोखिम में डालकर नदी पार करते हैं।

बीमारी बन जाती है बड़ी चुनौती
गांव तक एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती। किसी मरीज या गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाने के लिए पहले नदी तक पहुंचाना और फिर उफनते पानी को पार करना पड़ता है। ग्रामीणों का दावा है कि पिछले वर्ष समय पर इलाज नहीं मिलने से एक युवक की मौत भी हो चुकी है।

वर्षों से मिल रहे सिर्फ आश्वासन
ग्रामीणों के अनुसार पुल और सड़क की मांग वर्षों से की जा रही है। वर्तमान सांसद ज्योत्सना महंत, तत्कालीन विधायक मोहितराम केरकेट्टा तथा वर्तमान विधायक तुलेश्वर मरकाम भी गांव पहुंचकर आश्वासन दे चुके हैं। जिला प्रशासन को कई बार आवेदन दिए गए, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई।

ग्रामीणों का सवाल है कि जब जिले में जिला खनिज न्यास (DMF) और विभिन्न विभागों के माध्यम से करोड़ों रुपये के विकास कार्य कराए जा रहे हैं, तो अमहवा जैसे गांव की मूलभूत आवश्यकता आज तक क्यों पूरी नहीं हो सकी?

ग्रामीणों की दो टूक चेतावनी
लगातार उपेक्षा से नाराज ग्रामीणों ने साफ कहा है कि यदि अगले चुनाव से पहले पुल और सड़क निर्माण का कार्य शुरू नहीं हुआ तो पूरा गांव चुनाव का बहिष्कार करेगा। उनका कहना है कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीनी विकास चाहिए।

अमहवा की कहानी आज भी यह सवाल खड़ा करती है कि क्या विकास केवल कागजों और घोषणाओं तक सीमित रहेगा, या फिर इस बार सचमुच गांव तक पुल और सड़क पहुंचेगी।