‘अश्लील कंटेंट’ का डर दिखाकर दंपत्ति से लाखों की ठगी की कोशिश नाकाम

डिजिटल अरेस्ट के नाम पर बनाया दबाव, साइबर थाना की सतर्कता से बची रकम

कोरबा। जिले में साइबर ठगी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इस बीच आयुष विभाग के एक कर्मचारी और उनकी सेवानिवृत्त पत्नी को डिजिटल अरेस्ट जैसी स्थिति में फंसाकर लाखों रुपये ठगने का प्रयास किया गया। हालांकि समय रहते सतर्कता बरतने और साइबर पुलिस से संपर्क करने के कारण दंपत्ति बड़ी आर्थिक ठगी का शिकार होने से बच गए।

जानकारी के अनुसार, कोरकोमा निवासी आयुष विभाग के कर्मचारी विकास नेताम के मोबाइल पर एक कॉल आया।

कॉल करने वाले ने खुद को नई दिल्ली के टेलीकॉम विभाग का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके नाम से जारी एक सिम का उपयोग अश्लील कंटेंट भेजने में किया गया है।

अतिरिक्त सिम की जानकारी नहीं होने के बावजूद साइबर ठग ने उन्हें लगातार धमकाते हुए अपने झांसे में लेने का प्रयास किया।

बताया गया कि ठगों ने दंपत्ति को कई घंटे तक मोबाइल चालू रखने के लिए मजबूर किया और डिजिटल अरेस्ट जैसी स्थिति बनाकर लाखों रुपये आरटीजीएस के माध्यम से अपने खाते में ट्रांसफर करने का दबाव बनाया। लगातार धमकियों से दंपत्ति मानसिक रूप से काफी परेशान हो गए।

इसी दौरान दंपत्ति ने छुरी स्थित एक परिचित शिक्षक से पूरी घटना साझा की। शिक्षक ने उन्हें घबराने के बजाय तत्काल साइबर पुलिस से संपर्क करने की सलाह दी। इसके बाद दंपत्ति सीधे साइबर थाना कोरबा पहुंचे और पूरे मामले की जानकारी दी।

साइबर थाना पुलिस ने तत्काल आवश्यक कार्रवाई करते हुए बैंक खाते को फ्रीज कराया, जिससे किसी प्रकार का वित्तीय नुकसान नहीं हुआ। साथ ही राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर भी शिकायत दर्ज कराई गई। समय पर कार्रवाई होने से दंपत्ति की लाखों रुपये की राशि सुरक्षित बच गई।

साइबर थाना प्रभारी ने नागरिकों से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति खुद को किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर डिजिटल अरेस्ट, अश्लील कंटेंट, मनी लॉन्ड्रिंग या किसी अन्य मामले में डराने-धमकाने का प्रयास करे तो घबराएं नहीं।

किसी भी प्रकार की रकम ट्रांसफर करने से पहले पुलिस से संपर्क करें और तत्काल 1930 साइबर हेल्पलाइन या निकटतम साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराएं। सतर्कता और त्वरित सूचना ही साइबर ठगी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।