राजभाषा आयोग के जिला स्तरीय सम्मेलन में भाषा, साहित्य और संस्कृति पर हुआ मंथन
कोरबा। छत्तीसगढ़ी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की दिशा में प्रयासों को और मजबूती देने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के तत्वावधान एवं मुकुटधर साहित्य समिति, कोरबा के सहयोग से जिला स्तरीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में भाषा, साहित्य, संस्कृति और छत्तीसगढ़ी अस्मिता से जुड़े विभिन्न विषयों पर व्यापक चर्चा हुई।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती एवं छत्तीसगढ़ महतारी की वंदना के साथ हुआ। सम्मेलन की अध्यक्षता प्रदेश के उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने की। मुख्य अतिथि के रूप में राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा उपस्थित रहे।
विशिष्ट अतिथियों में महापौर संजूदेवी राजपूत, सभापति नूतन सिंह ठाकुर, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन सिंह, जिला पंचायत सीईओ दिनेश नाग तथा अन्य जनप्रतिनिधि शामिल रहे।
राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा ने कहा कि छत्तीसगढ़ी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए आयोग लगातार प्रयासरत है। उन्होंने इसे छत्तीसगढ़ की पहचान और अस्मिता से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताते हुए समाज के सभी वर्गों से सहयोग की अपील की।
सम्मेलन के दूसरे सत्र में “पुरखा के सुरता” विषय पर विचार गोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें साहित्यकारों और विद्वानों ने छत्तीसगढ़ी भाषा, संस्कृति और लोक परंपराओं पर अपने विचार व्यक्त किए। वहीं तीसरे सत्र में आयोजित भव्य कवि सम्मेलन में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए लगभग 80 कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
पुस्तकों का विमोचन और साहित्यकारों का सम्मान
सम्मेलन के दौरान वरिष्ठ साहित्यकारों की नई पुस्तकों का विमोचन किया गया। साथ ही कोरबा के वरिष्ठ कवि उमेश अग्रवाल और दीप दुर्गवी को साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। पंडित मुकुटधर पांडेय के परिवार से हनी तिवारी को भी विशेष सम्मान प्रदान किया गया।
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