कोरबा। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित ज्ञानभारतम् मिशन राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के तहत कोरबा जिले में 16वीं शताब्दी की लगभग 400 वर्ष पुरानी कल्चुरीकालीन हस्तलिखित पांडुलिपि मिलने से इतिहास और संस्कृति के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। कलेक्टर कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन में जिले में चल रहे सर्वेक्षण अभियान के दौरान यह दुर्लभ धरोहर पुरानी बस्ती स्थित राजगढ़ी राजमहल में मिली।
ज्ञानभारतम् मिशन के जिला समन्वयक सतीश प्रकाश सिंह के नेतृत्व में किए गए सर्वेक्षण में कोरबा की अंतिम शासिका स्वर्गीय रानी धनराज कुंवर देवी के नाती कुमार रविभूषण प्रताप सिंह के निवास पर यह प्राचीन पांडुलिपि संरक्षित मिली। इसके साथ ही श्रीमद्भागवत पुराण और सुखसागर बारहवां स्कंध सहित कुल 27 प्राचीन हस्तलिखित पांडुलिपियों का भी पता लगाया गया।
जिला समन्वयक सतीश प्रकाश सिंह ने “ज्ञानभारतम् ऐप” के माध्यम से इन सभी पांडुलिपियों का डिजिटल संरक्षण कराया। उन्होंने बताया कि पांडुलिपियां मोटे पुराने कागज पर काली स्याही से देवनागरी और संस्कृत भाषा में लिखी गई हैं तथा अत्यंत जर्जर अवस्था में हैं। इन्हें वर्षों से लाल कपड़े में लपेटकर पूजा घर में सुरक्षित रखा गया था और करीब 20 साल बाद पहली बार बाहर निकाला गया।
सर्वेक्षण के दौरान पांडुलिपियों के ऐतिहासिक महत्व की पुष्टि के लिए वरिष्ठ इतिहासकार एवं भाषाविद डॉ. रमेन्द्रनाथ मिश्र से भी चर्चा की गई। उनके द्वारा दी गई जानकारी को भी डिजिटल रिकॉर्ड में शामिल किया गया है।
जानकारी के अनुसार पुराने राजपरिवार के समय इन पांडुलिपियों का उपयोग धार्मिक आयोजनों में वाचन के लिए किया जाता था। इसके अलावा अंग्रेजी शासनकाल में 19वीं शताब्दी के कोलकाता छापाखाने से प्रकाशित स्कंध पुराण की लगभग 300 पृष्ठों की दुर्लभ प्रति भी मिली है, जिसका भी डिजिटल संरक्षण कर लिया गया है।
ज्ञानभारतम् मिशन के तहत कोरबा जिले में प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण का कार्य लगातार जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज क्षेत्र के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाएगी।
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