कलेक्टर कुणाल दुदावत की पहल पर दुर्गम वनांचल में एंबुलेंस तैनात, 20 गांवों की 16 हजार आबादी को मिल रहा लाभ
कोरबा। कलेक्टर कुणाल दुदावत के निर्देश पर जिले के अत्यंत दुर्गम वनांचल लेमरू क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं का एक नया अध्याय शुरू हुआ है। जिला मुख्यालय से लगभग 80 से 90 किलोमीटर दूर स्थित यह क्षेत्र भौगोलिक दृष्टि से बेहद चुनौतीपूर्ण है और यहां विशेष रूप से संरक्षित पिछड़ी जनजातियों जैसे पहाड़ी कोरवा और बिरहोर की बड़ी आबादी निवास करती है।
5-6 घंटे में मिल पाता था इलाज
लंबे समय तक यह इलाका स्वास्थ्य सुविधाओं से लगभग कटा रहा, जहां किसी भी आपात स्थिति में मरीज को अस्पताल तक पहुंचाने में 5 से 6 घंटे का बहुमूल्य समय लग जाता था। कई बार समय पर उपचार नहीं मिलने से स्थिति गंभीर हो जाती थी।
कलेक्टर की पहल पर शुरू हुई एम्बुलेंस सेवा
प्रशासन ने इस चुनौती को गंभीरता से लेते हुए लेमरू क्षेत्र में संजीवनी एक्सप्रेस 108 एम्बुलेंस सेवा की शुरुआत की है। कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत की पहल और मार्गदर्शन में शुरू हुई यह सेवा अब इस वनांचल क्षेत्र के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है। आधुनिक चिकित्सा उपकरणों से लैस यह एम्बुलेंस अब एक फोन कॉल पर गांवों तक पहुंच रही है।
20 गांवों की 16 हजार आबादी को लाभ
सीएमएचओ ने बताया कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेमरू के अंतर्गत आने वाले लगभग 20 गांवों की 16 हजार से अधिक आबादी को इस सेवा का सीधा लाभ मिल रहा है। इनमें 1700 से अधिक लोग विशेष पिछड़ी जनजातियों से संबंधित हैं। गढ़उपरोड़ा, देवपहरी, अरसेना, नकिया, लेमरू, रापा, बड़गांव, छातीबहार, लामपहाड़, डोकरमना, विमलता जैसे दूरस्थ गांव अब इस सेवा से सीधे जुड़े हैं।
चलती-फिरती जीवनरक्षक इकाई
संजीवनी 108 एम्बुलेंस केवल मरीजों को लाने-ले जाने का साधन नहीं है, बल्कि यह एक चलती-फिरती जीवनरक्षक इकाई के रूप में काम कर रही है। इसमें फोल्डेबल और कैनवास स्ट्रेचर, व्हीलचेयर, ऑक्सीजन सिलिंडर, पल्स ऑक्सीमीटर, बीपी और शुगर जांच उपकरण, बर्न किट, डिलीवरी किट, सक्शन मशीन, आवश्यक दवाएं तथा गंभीर मरीजों के लिए वेंटिलेटर (एएलएस सुविधा) उपलब्ध है। प्रशिक्षित ईएमटी स्टाफ हर समय सेवा के लिए तत्पर रहता है।
एक वर्ष में 1200 मरीजों को मिला समय पर उपचार
पिछले एक वर्ष में इस सेवा के माध्यम से लगभग 1200 मरीजों को समय पर उपचार मिल चुका है। हृदयघात, सड़क दुर्घटनाएं, सर्पदंश, प्रसव संबंधी जटिलताएं और मलेरिया-डेंगू जैसी गंभीर बीमारियों में यह सेवा कई लोगों के लिए जीवनरक्षक साबित हुई है।
भरोसे का प्रतीक बनी एम्बुलेंस
पहले जहां मरीजों को चारपाई पर ढोकर अस्पताल ले जाना पड़ता था, वहीं अब एम्बुलेंस की सायरन सुनते ही ग्रामीण रास्ता बना देते हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि यह सेवा किसी की जान बचाने आई है। लेमरू के ग्रामीणों के लिए यह सेवा केवल सुविधा नहीं, बल्कि भरोसे का प्रतीक बन चुकी है।
जिले में 12 नई एम्बुलेंस शामिल
कोरबा जिले को हाल ही में 12 नई संजीवनी 108 एम्बुलेंस प्राप्त हुई हैं, जिनमें से एक को विशेष रूप से लेमरू क्षेत्र में तैनात किया गया है। जिले में पहले से 11 पुरानी 108 और 14 महतारी 102 एम्बुलेंस सेवाएं संचालित हैं, जिससे संपूर्ण जिले की आपातकालीन स्वास्थ्य व्यवस्था और मजबूत हुई है।
गुणवत्ता सेवाओं के लिए पहले ही प्रमाणित है लेमरू PHC
लेमरू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अपनी गुणवत्तापूर्ण सेवाओं के कारण पहले ही राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (एनक्यूएएस) का प्रमाण पत्र प्राप्त कर चुका है। अब संजीवनी 108 सेवा के जुड़ने से यहां की स्वास्थ्य व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ हो गई है।
आदिवासी परिवारों को मिली बड़ी राहत
इस पहल से आर्थिक रूप से कमजोर आदिवासी परिवारों को भी बड़ी राहत मिली है, क्योंकि दुर्गम रास्तों और संसाधनों की कमी के कारण निजी वाहन का खर्च उठाना उनके लिए कठिन था। अब सरकारी एम्बुलेंस सेवा के माध्यम से उन्हें बिना किसी अतिरिक्त बोझ के त्वरित चिकित्सा सहायता मिल रही है।
Editor – Niraj Jaiswal
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