मैनुअल स्कैवेंजिंग कानून उल्लंघन का आरोप, सुरक्षा और नियमितीकरण की मांग तेज
कोरबा।सफाई कर्मचारियों के शोषण और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे अब राष्ट्रीय स्तर पर उठने लगे हैं। शोषित वंचित समाज परिसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष उमेश पिंपरे द्वारा आयोजित दो दिवसीय “चिंतन मंथन” कार्यक्रम में देशभर से आए प्रतिनिधियों के बीच इस गंभीर विषय पर चर्चा हुई, जिसमें कोरबा से भी पदाधिकारियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान कोरबा के प्रतिनिधि सिकन्दर उसर वर्षा ने नई दिल्ली में सफाई कर्मचारी आयोग के उपाध्यक्ष हरदीप सिंह गिल और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो से मुलाकात कर छत्तीसगढ़ में सफाई कर्मचारियों के शोषण का मुद्दा उठाया।
उन्होंने आरोप लगाया कि मैनुअल स्कैवेंजिंग एक्ट 2013 का उल्लंघन करते हुए एसईसीएल, सीएसईबी, एनटीपीसी सहित कई संस्थानों में आज भी बिना सुरक्षा उपकरणों के कर्मचारियों से सीवर और सैप्टिक टैंक की सफाई कराई जा रही है। इससे श्रमिकों की जान जोखिम में बनी हुई है।
सिकन्दर उसर वर्षा ने यह भी कहा कि रायपुर के एक निजी अस्पताल में सीवर हादसे में तीन लोगों की मौत के बाद भी कोरबा जिले में संबंधित संस्थानों से सफाई व्यवस्था और सुरक्षा उपायों की जानकारी नहीं ली गई, जो चिंता का विषय है।
प्रतिनिधिमंडल ने सफाई कर्मचारियों के नियमितीकरण, ठेका प्रथा समाप्त करने और सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने की मांग को लेकर ज्ञापन भी सौंपा। साथ ही विभिन्न दस्तावेज, समाचार और वीडियो साक्ष्य भी प्रस्तुत किए गए।
आयोग के पदाधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द ही कोरबा जिले का दौरा करने का आश्वासन दिया है, जिससे स्थानीय स्तर पर जांच और कार्रवाई की उम्मीद बढ़ गई है।
Editor – Niraj Jaiswal
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