कोरबा।कृषि को लंबे समय से मानसून पर निर्भर माना जाता रहा है, लेकिन अब कोरबा जिले के किसान इस धारणा को बदलते नजर आ रहे हैं। पारंपरिक फसलों की तुलना में बेहतर लाभ के लिए किसानों ने दलहन, तिलहन और अनाज की खेती की ओर रुख किया है, जिससे उनकी आमदनी में बढ़ोतरी हो रही है।
वर्ष 2025-26 के रबी सीजन में जिले के पांच विकासखंडों में किसानों ने अपने कृषि रकबे का बेहतर उपयोग किया। कृषि विभाग द्वारा अनाज फसलों के लिए 3742 हेक्टेयर का लक्ष्य रखा गया था, जिसके विरुद्ध 3182 हेक्टेयर में बोवनी की गई।
वहीं दलहन फसलों चना, मटर, मसूर, मूंग, उड़द आदि के लिए 8088 हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसके मुकाबले 7644 हेक्टेयर में खेती की गई। तिलहन फसलों के प्रति भी किसानों की रुचि बढ़ी है, जिसमें सरसों, मूंगफली, सूर्यमुखी, कुसुम और तोरिया की फसलें शामिल हैं। इनका लक्ष्य 10360 हेक्टेयर था, जिसके विरुद्ध 10054 हेक्टेयर में खेती हुई।
सब्जी एवं अन्य फसलों के लिए निर्धारित लक्ष्य की शत-प्रतिशत पूर्ति करते हुए 18671 हेक्टेयर क्षेत्र में खेती की गई। इस प्रकार जिले में रबी सीजन के दौरान कुल 39551 हेक्टेयर में विभिन्न फसलों की बोवनी की गई।
कृषि विभाग के उपसंचालक देवेन्द्र पाल सिंह कंवर ने बताया कि अंतरवर्तीय फसलों के उत्पादन से भी किसानों को अच्छा लाभ मिल रहा है। साथ ही, किसानों को शासन की योजनाओं की जानकारी देकर सब्सिडी का लाभ भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
जिले में बदलती खेती की यह तस्वीर दर्शाती है कि अब किसान आधुनिक तकनीकों और बेहतर फसल चयन के जरिए कृषि को लाभ का सौदा बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
Editor – Niraj Jaiswal
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