कोरबा। ऊर्जाधानी कोरबा में बिजली व्यवस्था पूरी तरह बेकाबू हो गई है। गर्मी बढ़ते ही रोजाना 4 से 5 बार हो रही अघोषित कटौती और ट्रिपिंग ने आमजन का जीना मुहाल कर दिया है।
जिले में गर्मी की दस्तक के साथ बिजली की मांग 35 मेगावाट से बढ़कर 45 मेगावाट तक पहुंच गई है। लोड बढ़ने से पुराने तारों ने जवाब देना शुरू कर दिया है। फीडर कंडक्टर पर दबाव बढ़ते ही तार टूट रहे हैं और पूरा इलाका घंटों अंधेरे में डूब जाता है।
110 करोड़ का बजट, फिर भी काम नहीं
केंद्र सरकार की आरडीएसएस योजना के तहत कोरबा के लिए 110 करोड़ रुपये स्वीकृत हैं। इस राशि से नए खंभे, केबल और ट्रांसफार्मर लगाने थे, लेकिन दो साल बीत जाने के बावजूद शहरी इलाकों में काम शुरू तक नहीं हुआ है।
शहर अब भी 25 साल पुराने जर्जर कंडक्टरों के भरोसे बिजली सप्लाई पर निर्भर है। नेहरू नगर, आजाद नगर जैसे स्लम इलाकों में तारों का मकड़जाल हादसों को न्योता दे रहा है। शहर के 72 फीडरों में से 20 फीडर पूरी तरह जवाब दे चुके हैं।
जिले में लगभग 2400 ट्रांसफार्मर लगे हैं, जिनमें से ज्यादातर असुरक्षित और खुले में हैं। सड़कों के किनारे लगे खंभों को भारी वाहन बार-बार टक्कर मारकर तोड़ रहे हैं।
कार्यपालन अभियंता रोशन वर्मा और प्रभारी ईई एच.एस. राठौर ने बताया कि सुधार का प्रस्ताव भेजा जा चुका है। कोशिशें लगातार जारी हैं। जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी और काम में तेजी लाई जाएगी।
Editor – Niraj Jaiswal
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