कुलपति ने किया कृषि महाविद्यालय कोरबा का दौरा: नए भवन एवं छात्रावास का लोकार्पण,‘अंकुरम 2026’ में छात्रों को प्रेरित किया

कोरबा। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, कोरबा का आधिकारिक दौरा किया। इस दौरान उन्होंने नवनिर्मित महाविद्यालय भवन और बालक छात्रावास का विधिवत लोकार्पण किया, जिससे संस्थान की शैक्षणिक एवं आवासीय क्षमता में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है।

दौरे के दौरान कुलपति ने महाविद्यालय परिसर का विस्तृत निरीक्षण किया। उन्होंने कंप्यूटर लैब, केंद्रीय पुस्तकालय, एग्रोनॉमी, कृषि अभियांत्रिकी तथा पादप प्रजनन प्रयोगशालाओं का अवलोकन किया। प्राध्यापकों और विद्यार्थियों से संवाद कर शैक्षणिक गतिविधियों की सराहना की तथा नवाचार, शोध और व्यावहारिक शिक्षा पर विशेष जोर दिया।

महाविद्यालय के वार्षिक उत्सव ‘अंकुरम 2026’ एवं छात्र संघ शपथ ग्रहण समारोह में अधिष्ठाता डॉ. आर.के. साहू ने स्वागत भाषण देते हुए संस्थान की वार्षिक उपलब्धियों का विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि बीते वर्ष शिक्षण गुणवत्ता, छात्र संख्या, परीक्षा परिणामों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। प्रयोगशालाओं, फील्ड डेमोंस्ट्रेशन और शैक्षणिक भ्रमणों के माध्यम से व्यावहारिक शिक्षा को मजबूत किया गया है।

कार्यक्रम में सेमियेलाटा फसलों पर आधारित जानकारीपूर्ण पंपलेट एवं पुस्तक का विमोचन किया गया, जिसे डॉ. डी.के. कौशिक, डॉ. आर.के. भारद्वाज और डॉ. राजेश साहू ने तैयार किया है। साथ ही कार्स कोरबा एवं आईआरआरआई हैदराबाद के सहयोग से तैयार चूजों का वितरण ग्रामीण महिला कृषकों को किया गया।

छात्र कल्याण अधिष्ठाता डॉ. संजय शर्मा ने विद्यार्थियों के शैक्षणिक, खेल एवं सांस्कृतिक क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना की और कहा कि सह-पाठ्यक्रम गतिविधियां छात्रों के व्यक्तित्व विकास एवं नेतृत्व क्षमता को मजबूत करती हैं।

मुख्य अतिथि कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने अपने उद्बोधन में कृषि शिक्षा की राष्ट्रीय विकास में भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने छात्रों को टिकाऊ कृषि पद्धतियों, तकनीकी नवाचारों और किसानों की आय बढ़ाने वाले प्रयासों में योगदान देने के लिए प्रेरित किया। नव-निर्वाचित छात्र संघ को शपथ दिलाते हुए उन्होंने अनुशासन, जिम्मेदारी और संस्थान के प्रति निष्ठा पर बल दिया।

दौरे के दौरान कुलपति ने पोल्ट्री शेड और वर्मी-कम्पोस्ट इकाई का भी निरीक्षण किया। उन्होंने इन इकाइयों को व्यावहारिक प्रशिक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए कहा कि पशुपालन एवं जैविक कृषि गतिविधियां किसानों की आय वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।

कार्यक्रम का समापन छात्रों द्वारा प्रस्तुत रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ हुआ, जिसमें उनकी प्रतिभा और उत्साह की झलक साफ दिखाई दी।