कोरबा। कोरबा शहर के व्यापारिक वर्ग में जीएसटी विभाग की रिकवरी कार्यवाही, विशेष रूप से बैंक खातों के अटैचमेंट को लेकर असंतोष चरम पर पहुंच गया है। इसी कड़ी में चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज कोरबा के पदाधिकारियों ने जीएसटी अधिकारियों से मुलाकात की और व्यापारियों की समस्याओं को लेकर एक ज्ञापन सौंपा। उन्होंने बैंक खातों को अटैच करने की प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति जताई और इसे व्यापारिक गतिविधियों के लिए घातक बताया।
चैंबर अध्यक्ष योगेश जैन, महामंत्री नरेन्द्र अग्रवाल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष आर.पी. तिवारी और संरक्षक रामसिंह अग्रवाल ने संयुक्त रूप से अधिकारियों से चर्चा की। उन्होंने बताया कि पिछले एक माह से लगातार व्यापारियों के बैंक खाते अटैच किए जा रहे हैं, जिससे व्यापार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
कई मामलों में व्यापारी अपील प्रक्रिया में हैं, फिर भी खाते रिलीज नहीं हो रहे, जो अन्यायपूर्ण है। चैंबर ने चेतावनी दी कि यदि व्यापारियों के हितों की अनदेखी जारी रही तो आंदोलन या घेराव जैसे कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे।
असिस्टेंट कमिश्नर अनिमोह बांसवार और जीएसटी अधिकारी प्रभाकर उपाध्याय से हुई विस्तृत चर्चा में अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2017-18 से 2023-24 तक लंबित टैक्स भुगतान वाले मामलों में ही नियमों के तहत बैंक खाते अटैच किए जा रहे हैं।
महामंत्री नरेन्द्र अग्रवाल ने एक तिमाही रिटर्न न भरने पर भी खाते अटैच करने के मुद्दे को उठाया, जिस पर अधिकारियों ने जांच के बाद माना कि ऐसे कुछ मामले सामने आए हैं और आश्वासन दिया कि केवल तिमाही रिटर्न के मामलों में बैंक खाते अटैच नहीं किए जाएंगे।
हालांकि, अधिकारियों ने पुराने लंबित भुगतान के मामलों में अटैचमेंट को अनिवार्य बताया और उच्च स्तर के निर्देशों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि टैक्सपेयर्स से सीधी संवाद की कमी से गलतफहमियां होती हैं, जबकि विभाग पूरी तरह नियमों के अनुसार कार्य करता है। बैंक खाते अटैच करने से पहले सूचना देने में असमर्थता जताई गई।
बैठक के बाद व्यापारियों को आंशिक राहत की उम्मीद जगी है, लेकिन जीएसटी की सख्ती और व्यापारिक हितों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती बरकरार है। चैंबर ने व्यापारियों से एकजुट रहने और विभाग से संवाद बनाए रखने की अपील की है।
Editor – Niraj Jaiswal
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