कोरबा। छत्तीसगढ़ में बच्चों और युवाओं में टाइप-1 डायबिटीज (T1D) के बढ़ते मामलों को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सक्रिय पहल की है।
कलेक्टर कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी एस.एन. केशरी के नेतृत्व में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। यह कार्यशाला स्वास्थ्य विभाग, यूनिसेफ और एकम फाउंडेशन के सहयोग से संपन्न हुई।
प्रशिक्षण में जिले के 114 सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों को टाइप-1 डायबिटीज के बढ़ते प्रभाव, परामर्श तकनीकों, सामुदायिक जागरूकता तथा नैदानिक प्रबंधन के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने पेशेंट सपोर्ट ग्रुप एवं राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की भूमिका पर भी प्रकाश डाला।
कार्यशाला के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि स्वास्थ्य कर्मी किस प्रकार टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित बच्चों और उनके परिवारों को सामाजिक, मानसिक एवं आर्थिक चुनौतियों से निपटने में सहयोग प्रदान कर सकते हैं।
बताया गया कि भारत में टाइप-1 डायबिटीज से प्रभावित बच्चों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और छत्तीसगढ़ में भी ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में इसके मामलों में वृद्धि देखी जा रही है।
प्रशिक्षण सत्र का संचालन सीएमएचओ डॉ. केशरी, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. स्मिता सोना, यूनिसेफ स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. गजेन्द्र सिंह एवं जिला प्रबंधक (अस्पताल) कुमारी गीता एक्का द्वारा किया गया। कार्यक्रम के सफल संचालन में जिला प्रबंधक (एनएचएम) पद्माकर शिंदे और एनसीडी कंसल्टेंट डॉ. नरेन्द्र जायसवाल का विशेष योगदान रहा।
स्वास्थ्य विभाग की यह पहल समय पर पहचान, बेहतर उपचार एवं प्रभावी परामर्श के माध्यम से मरीजों के जीवन स्तर में सुधार लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के प्रशिक्षण गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) के प्रभावी नियंत्रण में सहायक सिद्ध होंगे।
Editor – Niraj Jaiswal
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