कोटपा अधिनियम 2003 पर जिला स्तरीय लॉ इन्फोर्समेंट कार्यशाला सम्पन्न, 40 अधिकारियों को मिला प्रशिक्षण

कोरबा।राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम (NTCP) के तहत जिले में तंबाकू के दुष्प्रभावों और कोटपा अधिनियम 2003 के सख्त क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए एक जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कलेक्टर  कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एस.एन. केशरी के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यशाला में विभिन्न विभागों के 40 प्रतिभागियों को विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

कार्यशाला में तंबाकू सेवन से होने वाले गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों, जैसे कैंसर, हृदय रोग और श्वसन संबंधी बीमारियों पर विस्तार से चर्चा हुई।

विशेषज्ञों ने कोटपा अधिनियम 2003 की प्रमुख धाराओं की जानकारी दी, जिनमें शामिल हैं:

धारा 4: सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पर पूर्ण प्रतिबंध (जुर्माना अधिकतम 200 रुपये तक)।

धारा 5: तंबाकू उत्पादों के प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष विज्ञापन, प्रचार और प्रायोजन पर रोक।

धारा 6: 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों को तंबाकू उत्पाद बेचने पर रोक, तथा शैक्षणिक संस्थानों के 100 गज (लगभग 91 मीटर) के दायरे में बिक्री पर प्रतिबंध।

ई-सिगरेट पर सख्त कार्यवाही, हुक्का बार में पूर्ण प्रतिबंध, तथा विद्यालयों को तंबाकू मुक्त बनाने के मानकों पर भी गहन चर्चा हुई।

प्रशिक्षण सत्र में विवेक त्रिपाठी (उप संचालक, अभियोजन), डॉ. मानसी जायसवाल (जिला सलाहकार, NTCP) और सुनील कुमार साण्डे (औषधि निरीक्षक) ने प्रमुख भूमिका निभाई। साथ ही, जिला चिकित्सालय कोरबा में स्थित तंबाकू नशा मुक्ति केंद्र में उपलब्ध निःशुल्क परामर्श, दवाओं और सहायता की जानकारी साझा की गई।

कार्यशाला के दौरान आईईसी (सूचना, शिक्षा और संचार) सामग्री एवं पैंफलेट भी वितरित किए गए, ताकि जागरूकता और अधिक बढ़ सके।

कार्यशाला में नोडल अधिकारी (तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम) डॉ. कुमार पुष्पेश, डीपीएम पद्माकर शिंदे,दुष्यंत कोटांगले और संतोष केंवट सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

यह पहल तंबाकू मुक्त समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देगी, क्योंकि भारत में तंबाकू उपयोग से हर साल लाखों मौतें होती हैं और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में भी इसका प्रभाव बढ़ रहा है। कोटपा अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन से युवाओं, खासकर छात्रों को तंबाकू की लत से बचाया जा सकेगा।

स्वास्थ्य विभाग का यह प्रयास जिले में तंबाकू नियंत्रण को मजबूत बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है।