लेबर कोड के विरोध में श्रमिकों की देशव्यापी हड़ताल, कोरबा की खदानों में उत्पादन व डिस्पैच प्रभावित

जिले में मिला-जुला असर, पावर और अन्य उद्योगों में कामकाज सामान्य

कोरबा।केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए नए लेबर कोड के विरोध में केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर आयोजित देशव्यापी हड़ताल का असर कोरबा जिले के कोयला क्षेत्र में स्पष्ट रूप से देखने को मिला। खदानों में उपस्थिति प्रभावित होने से उत्पादन और डिस्पैच बाधित हुआ, जिससे South Eastern Coalfields Limited (एसईसीएल) को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। हालांकि पावर प्लांट और अन्य औद्योगिक सेक्टर में कामकाज पर व्यापक असर नहीं पड़ा।

चार यूनियनों का समर्थन, एक संगठन रहा अलग
हड़ताल का आह्वान इंटक, एटक, सीटू और एचएमएस जैसी प्रमुख ट्रेड यूनियनों ने किया था, जबकि कोयला खदान मजदूर संगठन इससे अलग रहा। यूनियनों ने कोरबा, कुसमुंडा, गेवरा और दीपका विस्तार क्षेत्रों में पहले से व्यापक तैयारी की थी। हड़ताल के दिन पदाधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय रहे और मजदूरों से समर्थन की अपील की।

44 श्रम कानूनों को 4 कोड में बदलने का विरोध
यूनियनों ने केंद्र सरकार द्वारा 44 श्रम कानूनों को समाहित कर 4 लेबर कोड लागू करने के फैसले को मजदूर हितों के खिलाफ बताया। उनका आरोप है कि इससे श्रमिक अधिकार कमजोर होंगे और निजीकरण को बढ़ावा मिलेगा।

गेवरा माइंस में काम बंद
गेवरा क्षेत्र में कांग्रेस नेताओं ने हड़ताल का समर्थन करते हुए मशीनें बंद कराईं। जिला कांग्रेस प्रमुख हरीश परसाई, वरिष्ठ नेता तनवीर अहमद सहित अन्य कार्यकर्ता गेवरा खदान पहुंचे और श्रमिकों के साथ प्रदर्शन किया। नेताओं ने भाजपा सरकार की नीतियों का विरोध जारी रखने की बात कही।

सीटू ने बताया ऐतिहासिक
ट्रेड यूनियन सीटू के महासचिव और पूर्व सांसद Elamaram Kareem ने हड़ताल को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि देशभर के 2,000 से अधिक स्थानों पर हजारों मजदूरों और किसानों ने भाग लिया। उन्होंने दावा किया कि यह हाल के वर्षों की सबसे बड़ी हड़तालों में से एक रही।

मिला-जुला असर
कोरबा जिले के कोल सेक्टर में उत्पादन और परिवहन प्रभावित हुआ, लेकिन असंगठित कामगारों की दूरी के कारण कुछ खदानों में कामकाज आंशिक रूप से जारी रहा। पावर सेक्टर और अन्य उद्योगों में कार्य लगभग सामान्य रहा।