कोरबा।कोरबा जिले के विकासखंड करतला अंतर्गत ग्राम बड़मार निवासी संजय सुमन ने आधुनिक बायोफ्लॉक तकनीक अपनाकर मछली पालन को सफल व्यवसाय के रूप में स्थापित किया है। सीमित भूमि में अधिक उत्पादन और बेहतर आय का उदाहरण पेश करते हुए उन्होंने यह साबित कर दिया है कि नई तकनीक और सरकारी योजनाओं का सही उपयोग किसानों की आर्थिक तस्वीर बदल सकता है।
संजय सुमन ने मात्र 25 डिसमिल (लगभग 0.25 एकड़) भूमि पर बायोफ्लॉक तालाब तैयार किया। इस तकनीक में तालाब में विशेष लाइनर बिछाकर नियंत्रित वातावरण में तेजी से बढ़ने वाली उन्नत मछली प्रजातियों का पालन किया जाता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वर्ष में दो बार मछली उत्पादन संभव होता है, जिससे परंपरागत मछली पालन की तुलना में आय कई गुना बढ़ जाती है।
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत उन्हें 8.40 लाख रुपये का सरकारी अनुदान प्राप्त हुआ, जिसकी सहायता से उन्होंने बायोफ्लॉक सिस्टम स्थापित किया। पिछले वर्ष उन्होंने अपने तालाब से लगभग 6 मीट्रिक टन मछली का उत्पादन किया। बाजार में बिक्री के बाद उन्हें कुल 7 लाख 20 हजार रुपये की आय हुई, जबकि सभी लागत खर्च निकालने के बाद 3 लाख 20 हजार रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया।
बायोफ्लॉक तकनीक की खासियत यह है कि इसमें पानी की खपत कम होती है और मछलियों से निकलने वाले अपशिष्ट को सूक्ष्म बैक्टीरिया की सहायता से प्रोटीन युक्त प्राकृतिक आहार में बदल दिया जाता है। इससे लागत घटती है, उत्पादन बढ़ता है और पर्यावरण भी सुरक्षित रहता है।
अपनी सफलता से उत्साहित संजय सुमन अब आने वाले समय में अपने व्यवसाय का विस्तार कर उत्पादन और आय को दोगुना करने की योजना बना रहे हैं। उनकी यह उपलब्धि क्षेत्र के अन्य किसानों और युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है, जो अब स्वरोजगार के लिए बायोफ्लॉक तकनीक की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
संजय सुमन की सफलता यह संदेश देती है कि सही मार्गदर्शन, सरकारी सहयोग और आधुनिक तकनीक के माध्यम से छोटे स्तर पर भी बड़ा आर्थिक बदलाव संभव है।
Editor – Niraj Jaiswal
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