धान रकबा कटौती से परेशान आदिवासी किसान ने तहसील में जहर पिया, AAP ने मांगा सरकार से बेहतर उपचार और पूरा खर्च वहन

कोरबा। कोरबा जिले के कसियाडीह झांझ गांव के निवासी आदिवासी किसान बैसाखू मरकाम (लगभग 60 वर्ष) ने धान खरीदी के लिए अपने खेत के रकबा में कटौती होने से तंग आकर मंगलवार को कीटनाशक का सेवन कर खुदकुशी की कोशिश की।

किसान तहसील कार्यालय हरदीबाजार पहुंचे और अधिकारियों को अपनी समस्या बताई। जब रकबा सुधार में सहयोग नहीं मिला, तो उन्होंने वहीं जहर पी लिया। मौके पर मौजूद जिला पंचायत उपाध्यक्ष के पति मुकेश जायसवाल ने तुरंत उन्हें अस्पताल पहुंचाया। किसान की हालत गंभीर होने पर उन्हें बिलासपुर के सिम्स अस्पताल रेफर कर दिया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया जताई। प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष उत्तम जायसवाल ने झांझ गांव पहुंचकर पीड़ित परिवार से मुलाकात की और कहा कि प्रशासन की लापरवाही व एग्रीस्टेक पंजीयन जैसी समस्याओं के कारण यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई। पार्टी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में मांग की कि सरकार किसान का बेहतर उपचार कराए और पूरा इलाज खर्च वहन करे।

AAP नेताओं ने आरोप लगाया कि धान खरीदी शुरू होने से पहले ही पार्टी ने सरकार को इन समस्याओं के बारे में चेतावनी दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे पहले भी इसी तरह की प्रशासनिक लापरवाही के कारण किसानों ने आत्महत्या की है।

इस मौके पर AAP के कई पदाधिकारी जैसे अभिषेक मिश्रा, राजेश पुरी गोस्वामी, विनय गुप्ता, जगलाल राठिया आदि उपस्थित रहे।

यह घटना छत्तीसगढ़ में धान खरीदी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है, जहां किसान रकबा विवाद और टोकन न मिलने जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।