कोरबा/पोंडी उपरोड़ा। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किसानों को सिंचाई सुविधा प्रदान कर दोहरी फसल उत्पादन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए करोड़ों रुपये की योजनाएं संचालित की जा रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार के कारण इनका लाभ किसानों तक नहीं पहुंच पाता। ऐसा ही एक मामला पोंडी उपरोड़ा विकासखंड के सलिहा भाठा गांव से सामने आया है, जहां क्रेडा विभाग द्वारा डीएमएफ फंड से निर्मित लिफ्ट एरिगेशन परियोजना पिछले पांच वर्षों से पूरी तरह बंद पड़ी हुई है।
लगभग 6 करोड़ रुपये की लागत से बनी इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य करीब 100 एकड़ कृषि भूमि को सिंचित करना था, ताकि किसान नियमित पानी उपलब्धता से बेहतर फसल ले सकें। योजना की शुरुआत स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सरपंच की मौजूदगी में धूमधाम से भूमि पूजन के साथ हुई थी। शुरुआती दौर में ट्रायल भी सफल रहा, लेकिन कुछ दिनों बाद ही मशीन खराब हो गई। लंबे समय बाद मरम्मत तो कराई गई, मगर आज तक यह प्रणाली किसानों के किसी काम नहीं आई।


ग्रामीणों का आरोप है कि योजना कागजों और दिखावे तक सीमित रही, जबकि राशि की बड़े पैमाने पर बंदरबांट हुई।
उपकरण तो लगाए गए, लेकिन घटिया गुणवत्ता और रखरखाव की अनदेखी से पूरी व्यवस्था बेकार हो गई। इसका सीधा नुकसान किसानों को उठाना पड़ रहा है। क्षेत्र में सैकड़ों एकड़ में बोई गई सरसों की फसल सिंचाई के अभाव में सूखने की कगार पर है। किसान आर्थिक नुकसान और फसल बर्बादी से बेहद परेशान हैं, जबकि जिम्मेदार विभाग और अधिकारी मौन साधे बैठे हैं।
ग्रामीणों और किसानों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
साथ ही लिफ्ट एरिगेशन योजना को शीघ्र चालू कर किसानों को सिंचाई सुविधा मुहैया कराने की अपील की है। यदि समय पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो सरकारी धन और किसानों की मेहनत दोनों व्यर्थ जाते रहेंगे।
Editor – Niraj Jaiswal
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