गांव-शहर में घर-घर गूंजा ‘छेर…छेरा, कोठी के धान ला हेरतेच हेरा’, छत्तीसगढ़ी व्यंजनों की महक से महक उठे घर
कोरबा। छत्तीसगढ़ का लोकप्रिय पारंपरिक त्योहार छेरछेरा जिले भर में बड़े उल्लास और उमंग के साथ मनाया गया। गांवों से लेकर शहर तक सभी आयु वर्ग के लोग छेरछेरा मांगने घर-घर पहुंचे और नव धान की खुशियां बांटीं।
ग्रामीण क्षेत्रों में सुबह से दोपहर तक मंडलियां और टीमें बनाकर झोला-बोरी लेकर लोग घर-घर पहुंचे। वहीं शहरों में मुख्य रूप से बच्चे उत्साह से छेरछेरा मांगते नजर आए, जबकि कुछ जगहों पर महिलाओं की टीमें भी सक्रिय रहीं।
चारों तरफ ‘छेर…छेरा, कोठी के धान ला हेरतेच हेरा’ की गूंज सुनाई देती रही।
छत्तीसगढ़ी परिवारों के साथ-साथ अन्य प्रांतों के लोगों के घरों में भी छत्तीसगढ़ी व्यंजनों की खुशबू फैली रही। लोग बड़े चाव से ठेठ छत्तीसगढ़ी पकवान बनाए और परिजनों व पड़ोसियों के साथ साझा किए। सुबह से शाम तक छेरछेरा की खुशियां बनी रहीं, जिससे पूरे जिले में उत्सवी माहौल रहा।
यह पर्व नव धान्य की खुशी और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है, जिसमें दान देने और लेने की परंपरा लोगों को एक-दूसरे के करीब लाती है।
Editor – Niraj Jaiswal
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