हर 10 मिनट में बंद होने वाला फाटक, कोयला मालगाड़ियों का दबाव; बारिश से पहले काम नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी
कोरबा । कोरबा-पश्चिम क्षेत्र के कुसमुंडा स्थित इमलीछापर चौक के पास रेलवे ओवरब्रिज निर्माण का काम लगभग ढाई वर्ष से अधर में लटका हुआ है। परियोजना में बाधा बन रहे 11 मकानों को प्रशासन ने करीब छह माह पहले बरसात के दौरान जल्दबाजी में खाली कराकर तोड़ दिया था, ताकि निर्माण कार्य गति पकड़ सके। लेकिन जमीन पूरी तरह खाली होने के बावजूद राइट्स के अधिकारी अब तक काम शुरू करने नहीं पहुंचे हैं।
इस लापरवाही का सीधा असर कुसमुंडा, गेवरा-दीपका, भिलाई बाजार, हरदीबाजार, बांकीमोंगरा सहित लगभग 25 ग्रामों की करीब 2 लाख की आबादी पर पड़ रहा है।
इमलीछापर रेलवे फाटक दिनभर औसतन हर 10 मिनट में बंद होता है, क्योंकि यहां से 24 घंटे मालगाड़ियां गुजरती हैं। इससे लोगों को लंबे समय तक फाटक पर फंसना पड़ता है और कई लोग कुचैना होकर अंडरब्रिज मार्ग से स्टेशन चौक पहुंचने मजबूर हैं।
हर 10 मिनट में बंद होता फाटक
गेवरा रोड स्टेशन के पास होने के कारण रेलवे लाइन पर कोयला लदान के लिए लगातार मालगाड़ियों की आवाजाही होती है। कुसमुंडा खदान से कोरबा, चांपा, रायगढ़ सहित विभिन्न दिशाओं में जाने वाले लगभग 1000 मालवाहक वाहन भी इसी फाटक से गुजरते हैं। इससे प्रतिदिन हजारों लोग जाम और देरी का सामना करते हैं।
काम शुरू नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी
कुसमुंडा क्षेत्र के पूर्व पार्षद अमरजीत सिंह ने बताया कि 21–22 जून को प्रशासन ने बारिश के दौरान बिना पर्याप्त मोहलत दिए मकान हटवाकर लोगों को बेघर कर दिया था, लेकिन उसके बाद भी ओवरब्रिज निर्माण शुरू नहीं हुआ। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इसी महीने काम शुरू नहीं किया गया तो क्षेत्रवासी आंदोलन करेंगे। पार्षद गीता गवेल ने भी कहा कि वर्षों से अटके निर्माण के कारण जनता बेहद परेशान है और प्रशासन को गंभीरता दिखानी चाहिए।
एसईसीएल के सीएसआर से जारी फंड, फिर भी लटका काम
इमलीछापर चौक से कुचैना मोड़ तक फोरलेन निर्माण का काम पीडब्ल्यूडी द्वारा एसईसीएल के सीएसआर फंड से किया जाना है। वहीं, कुसमुंडा शिव मंदिर चौक से थाना चौक तक ओवरब्रिज बनाने की जिम्मेदारी राइट्स को दी गई है, जिसे एसईसीएल के सहयोग से पूरा होना है। इमलीछापर चौक के दोनों ओर आधा-अधूरा स्ट्रक्चर तैयार है, लेकिन रेलवे फाटक के ऊपर बनने वाले पिलरों और मुख्य ढांचे का काम पूरी तरह रुका हुआ है।
इमलीछापर के 11 मकान हटाए जाने के बाद निर्माण क्षेत्र पूरी तरह खाली हो चुका है, फिर भी पिलर निर्माण शुरू नहीं हुआ है। एसईसीएल के पीआरओ डॉ. सनीष चंद्र से संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन बात नहीं हो सकी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि अगली बारिश से पहले ओवरब्रिज तैयार नहीं हुआ तो समस्या और गंभीर हो जाएगी।
Editor – Niraj Jaiswal
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