600 कुत्तों की नसबंदी के बाद भी आतंक कायम: हर महीने औसतन 25मामले,लोग दहशत में

कोरबा। तीन वर्ष पहले जबलपुर की संस्था एनीमल वर्ल्ड के जरिए कोरबा नगर निगम ने 600 कुत्तों की नसबंदी कराई थी। उसके बाद अभियान बंद हो गया। वर्तमान में शहरी क्षेत्र में यहां-वहां कुत्तों के हिंसक होने के साथ इंसानों पर हमले बढ़ गए है। औसतन हर महीने 25 से अधिक ऐसे केस सामने आ रहे है। इससे लोग भयभीत है। यही हाल सडक़ों पर लावारिश मवेशियों का भी है। इसलिए इस पर सवाल खड़े होना लाजिमी है।

नगर निगम क्षेत्र में कुत्तों के हमलों की घटनाएं अन्य इलाकों की तुलना में अधिक हैं। हालांकि ग्रामीण और बाहरी क्षेत्रों में भी ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, पर उनकी संख्या अपेक्षाकृत कम है। आवारा और आक्रामक कुत्तों को नियंत्रित करने का जिम्मा जिनके पास है, वे खुद ही नदारद दिखाई दे रहे हैं।

बताया गया कि कुत्ता काटने की घटनाओं में पीडि़तों को पहले जिला अस्पताल जो मेडिकल कॉलेज से एफिलिएटेड है वहीं पर इंजेक्शन लगवाना अनिवार्य है। इसके बाद ही उन्हें अन्य सरकारी अस्पतालों से इलाज की सुविधा मिल सकती है।

अचानक झपटा और कर दिया जख्मी
कोतवाली थाना क्षेत्र के अंतर्गत पुरानी बस्ती में शनिवार की शाम एक ऐसी घटना घटी जिसने लोगों को दहशत में डाल दिया। एक व्यक्ति अपने रास्ते पर जा रहा था, तभी उसके पीछे चल रहा कुत्ता अचानक झपटा और उसे जख्मी कर दिया। घायल व्यक्ति जब प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचा, तो वहां एंटी-रेबीज इंजेक्शन नहीं मिला। उसे इलाज के लिए जिला अस्पताल भेज दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन जल्द कदम नहीं उठाता, तो ऐसे हमले और बढ़ सकते है।

प्रजनन काल में बढ़ रही घटनाएं
कुत्तों पर अनुसंधान करने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि ठंडी का मौसम कुत्तों के प्रजनन से जुड़ा होता है। यह दौर उनके व्यवहार में जेनेटिक व अन्य कारण से अप्रत्याशित बदलाव ला देता है। ऐसे में वे दूसरे के हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं करते और अपने आसपास किसी पर भी झपट पड़ते है। ऐसा कोई पहली बार नहीं हो रहा है। हर बार प्रजनन काल में कुत्तों का रवैय्या बदल जाता है। इसलिए यथासंभव लोगों को किसी भी क्षेत्र से आवाजाही के दौरान विशेष सतर्कता दिखाने की जरूरत है।