भाईचारे की मिसाल:बड़े भाई को बचाने के लिए छोटे भाई ने लगाई जान की बाजी, तेज बहाव में लापता

कोरबा जिले के राताखार एनीकेट डैम में शनिवार को पिकनिक के दौरान एक दिल दहला देने वाला हादसा हो गया। पवन सिंह (उम्र अज्ञात) नामक युवक ने अपने बड़े भाई श्याम सिंह को डूबने से बचाने के लिए तेज बहाव वाले डैम में छलांग लगा दी। श्याम को तो परिवार और दोस्तों ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन पवन तेज धारा में बह गया और अब तक लापता है।

घटना दोपहर करीब 2 बजे की बताई जा रही है। पवन अपने दोस्तों व परिवार के कुछ सदस्यों के साथ डैम के किनारे पिकनिक मना रहा था। नहाने के दौरान श्याम सिंह अचानक गहरे पानी में फंस गए और डूबने लगे। यह देखते ही पवन बिना सोचे-समझे पानी में कूद पड़ा। दोस्तों की मदद से श्याम को तो बचा लिया गया, लेकिन पवन का कोई सुराग नहीं मिला। डैम का जलस्तर ऊंचा होने और तेज बहाव के कारण बचाव कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।

सूचना मिलते ही दर्री थाना पुलिस, नगर सेना की गोताखोर टीम और स्थानीय प्रशासन ने तत्काल तलाश अभियान शुरू कर दिया। गोताखोरों ने डैम के आसपास के क्षेत्रों में सघन खोजबीन की, लेकिन अभी तक पवन का सुराग नहीं लगा।

पुलिस ने पिकनिक पर गए अन्य युवकों से गहन पूछताछ शुरू कर दी है, ताकि हादसे की सटीक परिस्थितियां स्पष्ट हो सकें। प्रारंभिक जांच में कोई लापरवाही का आरोप नहीं पाया गया है, लेकिन पुलिस डैम क्षेत्र में सुरक्षा उपायों की भी पड़ताल कर रही है।

पवन के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पवन के बड़े भाई गणेश सिंह ने बताया, “पवन हमारा सबसे छोटा और लाडला बेटा था। वह मजदूरी करके परिवार की आर्थिक मदद करता था। श्याम को बचाने के लिए उसने अपनी जान की बाजी लगा दी। हम सब टूट चुके हैं। बस यही दुआ है कि पवन सुरक्षित मिल जाए।” परिवार के सदस्य डैम किनारे ही डेरा डाले हुए हैं और बचाव टीम का इंतजार कर रहे हैं।

यह हादसा क्षेत्र में डैम और जलाशयों के आसपास सुरक्षा के प्रति जागरूकता की कमी को उजागर करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के बाद तेज बहाव वाले इलाकों में पिकनिक के दौरान सावधानी बरतना जरूरी है। प्रशासन ने डैम क्षेत्र में चेतावनी बोर्ड लगाने और गश्त बढ़ाने का ऐलान किया है।

बचाव अभियान रविवार सुबह फिर से शुरू होगा। पवन की तलाश में ड्रोन और अतिरिक्त गोताखोर दलों की मदद ली जा रही है। स्थानीय लोग भी सहयोग के लिए आगे आ रहे हैं। यह घटना भाईचारे और बहादुरी की मिसाल तो है, लेकिन परिवार के दर्द को कम करने के लिए अब सिर्फ चमत्कार की उम्मीद बाकी है।