भूविस्थापित किसान संघ ने की आंदोलन की घोषणा, 19 सितंबर को रैली और 7 अक्टूबर को घेराव

कोरबा।विजयनगर सामुदायिक भवन में कोयलाधानी भूविस्थापित किसान संघ की बैठक केंद्रीय अध्यक्ष और कोयला मजदूर पंचायत (एचएमएस) केंद्रीय उपाध्यक्ष गजेंद्र पाल सिंह तंवर की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में एसईसीएल गेवरा महाप्रबंधक को सौंपी गई दो प्रमुख मांगों पर चर्चा की गई, जिनमें भूविस्थापितों, स्थानीय बेरोजगारों और मजदूरों को आउटसोर्सिंग कंपनी पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड में समायोजित करने और भूविस्थापित प्रमाण पत्र प्रदान करने की मांग शामिल है। संगठन ने मांगें पूरी न होने पर आंदोलन तेज करने का ऐलान किया।

संघ ने पहले ही एसईसीएल गेवरा महाप्रबंधक को ज्ञापन सौंपा था, जिसमें गेवरा में मिट्टी और कोयला उत्खनन कार्य के लिए आउटसोर्सिंग कंपनी में भूविस्थापितों और स्थानीय बेरोजगारों-मजदूरों को प्राथमिकता देने की मांग की गई थी। इसके अलावा, जूनाडीह, बिनझरा, खुसरुडीह, धुरेना, सिरकी, गांधीनगर, विजयनगर जैसे प्रभावित गांवों के भूविस्थापितों को भूविस्थापित प्रमाण पत्र जारी करने और वैकल्पिक रोजगार में उनकी प्राथमिकता सुनिश्चित करने की मांग भी रखी गई।

14 सितंबर को गेवरा महाप्रबंधक कार्यालय में आयोजित बैठक में संगठन की मांगों पर सार्थक चर्चा नहीं हो सकी। इस पर नाराजगी जताते हुए अध्यक्ष गजेंद्र पाल सिंह तंवर ने आंदोलन की घोषणा की और महाप्रबंधक कार्यालय के घेराव की चेतावनी दी। विजयनगर बैठक में सैकड़ों भूविस्थापितों और स्थानीय बेरोजगारों ने आंदोलन की रणनीति तैयार की।

संगठन ने 19 सितंबर को सैकड़ों भूविस्थापितों और स्थानीय बेरोजगारों के नेतृत्व में रैली के रूप में ज्ञापन सौंपने का फैसला किया है। इसके बाद 7 अक्टूबर को गेवरा महाप्रबंधक कार्यालय का घेराव कर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं हुई तो आंदोलन का विस्तार किया जाएगा।

बैठक में प्रमुख रूप से सोनू चौहान, विजयंत कुमार, इंद्रपाल सिंह, दया सोनी, अजय कंवर, दिलीप कंवर, प्रकाश गुप्ता, दुबे कंवर, दुर्गेश कैवर्त्य, साहिल दास, मया राम, राय सिंह, मनोज केवट, मिलाप दास और आदित्य उपस्थित रहे। यह आंदोलन भूविस्थापितों के अधिकारों और स्थानीय रोजगार सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।