15 साल बाद भी अधूरी मां सर्वमंगला मंदिर ट्रस्ट गठन की प्रक्रिया, श्रद्धालुओं को सुविधाओं का इंतजार

कोरबा। ऊर्जाधानी कोरबा का प्राचीन और ऐतिहासिक मां सर्वमंगला मंदिर आज भी ट्रस्ट गठन की राह देख रहा है। 15 साल पहले शुरू हुई यह प्रक्रिया आज तक पूरी नहीं हो सकी। वर्ष 2009 में प्रशासनिक कार्रवाई के तहत 23 सितंबर को छत्तीसगढ़ राजपत्र में इसका प्रकाशन हुआ और मंदिर की चल-अचल संपत्तियों का आकलन 50 लाख रुपये किया गया, लेकिन इसके बाद प्रक्रिया ठप हो गई।

ट्रस्ट गठन की मांग लंबे समय से

मंदिर के लिए ट्रस्ट गठन की मांग समय-समय पर जनप्रतिनिधियों और भाजपा नेताओं द्वारा उठाई जाती रही है। आठ साल पहले तत्कालीन भाजपा जिलाध्यक्ष अशोक चावलानी, नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष योगेश जैन और कई पार्षदों ने तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को ज्ञापन सौंपकर मांग की थी कि मंदिर का संचालन ट्रस्ट के माध्यम से हो। चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष योगेश जैन ने कहा कि ट्रस्ट गठन से मंदिर का विकास होगा, चढ़ावे का पारदर्शी हिसाब होगा और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।

सर्वमंगला मंदिर में सालभर भक्तों की भीड़ रहती है, खासकर नवरात्रि में आस्था का सैलाब उमड़ता है। अनुमान के मुताबिक, मंदिर में हर साल करोड़ों रुपये का चढ़ावा आता है, जिसमें स्वर्णाभूषण और चांदी के छत्र भी शामिल हैं। इसके बावजूद, मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए बैठने, ठहरने, बच्चों के मनोरंजन या अन्य जनसुविधाओं का समुचित विकास नहीं हो सका है।

योगेश जैन ने बताया कि ट्रस्ट बनने से मंदिर का व्यवस्थित विकास संभव होगा। चढ़ावे का पारदर्शी हिसाब-किताब होगा और सामाजिक सरोकार के कार्यों को भी बढ़ावा मिलेगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि ट्रस्ट गठन से मंदिर की गरिमा बढ़ेगी और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि लंबे समय से लंबित ट्रस्ट गठन की प्रक्रिया पूरी होती है, तो मंदिर परिसर का कायाकल्प हो सकता है। वे मांग कर रहे हैं कि प्रशासन इस दिशा में त्वरित कदम उठाए ताकि मां सर्वमंगला मंदिर की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता के अनुरूप विकास कार्य हो सकें।