सत्य मार्ग की स्वीकारोक्ति है सर्वोपरि: आर्यिका रत्न

कोरबा।पर्यूषण पर्व के अवसर पर कोरबा के दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित आध्यात्मिक कार्यक्रमों के चतुर्थ दिवस पर उत्तम शौच धर्म पर चर्चा हुई। इस दौरान आर्यिका रत्न ने कहा कि सत्य मार्ग की स्वीकारोक्ति जीवन में सर्वोपरि है।

उन्होंने बताया कि तप और त्याग के माध्यम से व्यक्ति मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर होता है। शौच धर्म को आत्मस्वभाव का स्पर्श बताते हुए उन्होंने कहा कि आत्मा के अनुभव के बिना शौच धर्म का पालन संभव नहीं है। सभी धर्मों की शुरुआत आत्मानुभूति से ही होती है।

आर्यिका रत्न के प्रवचनों ने जैन धर्मावलंबियों को उत्तम शौच धर्म के महत्व को गहराई से समझाया। रात्रि में ‘कौन बनेगा ज्ञानवान’ जैसी प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ, जिसमें जैन समाज के पुरुषों, महिलाओं और बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

पर्यूषण पर्व के इस आयोजन ने न केवल आध्यात्मिक ज्ञान को बढ़ावा दिया, बल्कि जैन समाज में एकता और उत्साह का संचार भी किया। यह कार्यक्रम कोरबा के जैन समुदाय के लिए धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा।