गोल्डन आइलैंड में बिना रसीद के वसूली, वन विभाग पर उठे सवाल

कोरबा।जिले के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल गोल्डन आइलैंड में पर्यटकों से बिना रसीद के अवैध वसूली का मामला सामने आया है। केंदई वन रेंज में स्थित यह आइलैंड प्रकृति प्रेमियों के बीच लोकप्रिय है, जहां चोटिया से 15 किमी दूर बड़ी संख्या में लोग दोपहिया और चारपहिया वाहनों से पहुंचते हैं।

बैरियर पर दोपहिया वाहनों से 20 रुपये और चारपहिया वाहनों से 50 रुपये की वसूली की जा रही है, लेकिन इसके एवज में रसीद नहीं दी जा रही।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, बैरियर पर रसीद बुक टेबल पर पड़ी रहती है, लेकिन उसका उपयोग नहीं किया जाता।

वसूली का काम कुछ महिलाओं द्वारा किया जा रहा है, जो बिना रसीद दिए पर्यटकों से पैसे ले रही हैं। सवाल उठता है कि जब रसीद बुक उपलब्ध है, तो उसका उपयोग क्यों नहीं हो रहा?

सूत्रों का दावा है कि यह वसूली किसी वन अधिकारी या कर्मचारी के इशारे पर हो रही है, जिसमें मिलीभगत या दबाव की आशंका जताई जा रही है। इस अवैध वसूली से प्रतिदिन हजारों रुपये की राशि जेब में डाली जा रही है, जिसका कोई रिकॉर्ड नहीं रखा जा रहा।

पर्यटकों का कहना है कि वन विभाग द्वारा संचालित इस पर्यटन स्थल पर शुल्क वसूली की प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए। रसीद न देने से न केवल वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं, बल्कि यह भी संदेह पैदा हो रहा है कि वसूली गई राशि का दुरुपयोग हो रहा है। स्थानीय लोगों ने वन विभाग से इस मामले की जांच और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

गोल्डन आइलैंड जैसे लोकप्रिय पर्यटन स्थल पर अवैध वसूली का यह मामला न केवल पर्यटकों के विश्वास को ठेस पहुंचा रहा है, बल्कि वन विभाग की छवि को भी धूमिल कर रहा है।

विभाग को तत्काल इस मामले की जांच कर पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की आवश्यकता है, ताकि पर्यटकों को उचित सुविधा मिले और वसूली का हिसाब-किताब स्पष्ट रहे।