रजगामार भूमिगत खदान में नई तकनीक से कोयला उत्पादन की तैयारी, कंटीन्यूस माइनर मशीनों का होगा उपयोग

कोरबा। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) कोरबा क्षेत्र की बंद पड़ी रजगामार 6-7 नंबर भूमिगत खदान में 11 साल बाद कोयला उत्पादन फिर से शुरू करने की कवायद तेज हो गई है। नई तकनीक के तहत कंटीन्यूस माइनर मशीनों का उपयोग कर कोयला उत्पादन बढ़ाने की योजना है। खदान में दो मशीनें पहुंच चुकी हैं, और जल्द ही शेष पांच मशीनें भी पहुंच जाएंगी। प्रबंधन 1 अक्टूबर से उत्पादन शुरू करने की तैयारी में जुटा है।

कंटीन्यूस माइनर मशीनों से उत्पादन में तेजी

एसईसीएल कोरबा क्षेत्र में 58 कंटीन्यूस माइनर मशीनें उतारने की योजना बना रहा है, जिनमें से सात रजगामार खदान के लिए निर्धारित हैं। इन मशीनों की खासियत है कि ये 24 घंटे में 1200 से 1700 टन कोयला उत्पादन कर सकती हैं। पारंपरिक ब्लास्टिंग विधि के बजाय ये मशीनें कोयले को काटकर कन्वेयर बेल्ट के माध्यम से बाहर लाती हैं, जिससे कोल डस्ट की समस्या कम होती है और उत्पादन में तेजी आती है। जेनवेल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी इन मशीनों का संचालन करेगी, जिसमें 50 कर्मचारी नियोजित होंगे, जबकि शेष कर्मी एसईसीएल के होंगे।

रजगामार खदान का पुनर्जनन

वर्ष 2014 में केंद्रीय वन व पर्यावरण मंत्रालय से अनुमति न मिलने के कारण रजगामार की 6-7 नंबर खदान बंद कर दी गई थी। अब ग्राम सभा से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्राप्त कर खदान को पुनर्जनन की प्रक्रिया शुरू की गई है। अनुसूचित जनजाति व अन्य परंपरागत वन निवासी अधिनियम 2006 के तहत अनुमति ली गई है। खदान प्रबंधक, सब एरिया मैनेजर और जेनवेल कंपनी के अधिकारी संयुक्त रूप से कार्य को गति दे रहे हैं। वर्तमान में खदान में 200 कर्मचारी कार्यरत हैं, और उत्पादन शुरू होने पर 60-70 और कर्मियों की आवश्यकता होगी।

उत्कृष्ट कोयले का भंडार

जानकारों के अनुसार, रजगामार भूमिगत खदान का कोयला एसईसीएल की गेवरा, दीपका, कुसमुंडा और मानिकपुर खुली खदानों के कोयले से बेहतर है। इस कोयले का ताप अधिक होता है और राख कम निकलती है। खदान में 10 से 15 साल तक कोयला भंडार उपलब्ध होने का अनुमान है, जो क्षेत्र के लिए आर्थिक और औद्योगिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

क्षेत्र में रौनक की उम्मीद

खदान के बंद होने से रजगामार क्षेत्र वीरान हो गया था। उत्पादन शुरू होने के बाद क्षेत्र में फिर से रौनक लौटने की उम्मीद है। यह न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल देगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा। प्रबंधन का लक्ष्य अक्टूबर से खदान को पूरी तरह चालू करना है, जिसके लिए सभी तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं।

कंटीन्यूस माइनर मशीन की विशेषताएं

कंटीन्यूस माइनर मशीनें भूमिगत खदानों में ब्लास्टिंग की जरूरत को खत्म करती हैं। ये मशीनें कोयले को काटकर सीधे कन्वेयर बेल्ट पर डालती हैं और कटिंग के दौरान पानी का उपयोग कर फेस को गीला रखती हैं, जिससे धूल की समस्या कम होती है। इससे न केवल उत्पादन में तेजी आती है, बल्कि कार्यस्थल पर सुरक्षा भी बढ़ती है।