कोयला अधिकारियों के वेतन अपग्रेडेशन का मामला जल्द सुलझने के आसार, समिति ने की 20-40 हजार की बढ़ोतरी की सिफारिश

कोरबा। कोल इंडिया और उसकी सहायक कंपनियों के अधिकारियों के वेतनमान को महारत्न पीएसयू के समकक्ष लाने के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति ने अपनी रिपोर्ट कोयला मंत्रालय को सौंप दी है। समिति ने कोयला अधिकारियों के वेतन में 20 से 40 हजार रुपये तक की बढ़ोतरी की अनुशंसा की है। यह कदम कोयला मंत्रालय की उस मंशा को दर्शाता है, जिसमें वह जबलपुर हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई से पहले वेतन विसंगति के मामले को सुलझाना चाहता है।

19 मार्च 2025 को कोयला मंत्रालय ने संयुक्त सचिव भवानी प्रसाद पाती की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था, जिसमें कोल इंडिया, एनसीएल, और एमसीएल के निदेशक (कार्मिक) शामिल थे। समिति ने कोल इंडिया बोर्ड के 30 अगस्त 2023 के प्रस्ताव के आधार पर वेतन संशोधन की सिफारिश की है। इसमें प्रत्यक्ष भर्ती अधिकारियों का प्रारंभिक वेतनमान 60,000 से 1,80,000 रुपये करने और सभी श्रेणियों के कर्मचारियों के लिए समान अंतराल पर वेतन संशोधन की सलाह दी गई है।

समिति ने चीफ मैनेजर (ई-7) के लिए 20 हजार, सीनियर मैनेजर (ई-6) के लिए 30-40 हजार, और मैनेजर (ई-5) से ई-1 ग्रेड तक के अधिकारियों के लिए 20 से 40 हजार रुपये की वेतन वृद्धि की अनुशंसा की है। हालांकि, जीएम, कार्यकारी निदेशक, निदेशक, और सीएमडी स्तर के अधिकारियों के वेतन में कोई बदलाव का प्रस्ताव नहीं है। समिति ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि डीपीई के दिशा-निर्देशों का पालन हो और किसी भी अधिकारी को अनुचित आर्थिक लाभ या क्रम से बाहर पदोन्नति न मिले।

कोल माइंस ऑफिसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएमओएआई) लंबे समय से बीपीसीएल, ओएनजीसी, भेल, गेल, नालको जैसी महारत्न कंपनियों के समकक्ष वेतन की मांग कर रहा है। इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जबलपुर हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है। समिति की रिपोर्ट को कोयला मंत्रालय द्वारा हाईकोर्ट में प्रस्तुत किया जाएगा, हालांकि कोयला मंत्री ने अभी इस पर अपनी अंतिम अनुशंसा नहीं दी है।

वेतनमान में 1,80,000 तक की संशोधन की सिफारिश
जबलपुर हाईकोर्ट के आदेश के बाद समिति ने एनटीपीसी, ओएनजीसी, आईओसीएल, गेल, नालको, सेल, एनएमडीसी, मेकॉन, और एमएसटीसी जैसी कंपनियों के वेतनमान के आंकड़े जुटाए। समिति ने कोल इंडिया के अधिकारियों का वेतनमान 60,000 से 1,80,000 रुपये तक करने और डीपीई दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करने की सिफारिश की है। यह कदम कोयला अधिकारियों की लंबे समय से चली आ रही वेतन विसंगति को दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।