हाथियों का आतंक बरकरार, पसान और कुदमुरा रेंज में फसलों और घरों को भारी नुकसान

कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में कटघोरा और कोरबा वनमंडल में हाथियों का उत्पात थमने का नाम नहीं ले रहा है। वन विभाग की तमाम कोशिशों के बावजूद हाथियों के झुंड और दंतैल हाथी ग्रामीण क्षेत्रों में तबाही मचा रहे हैं।

कटघोरा वनमंडल के पसान रेंज में दो दंतैल हाथियों ने बीती रात तराईमार गांव में जमकर उत्पात मचाया, जहां धान की फसलों को रौंदने के साथ-साथ एक ग्रामीण के घर को भी नुकसान पहुंचाया। डरे हुए परिवार ने भागकर अपनी जान बचाई। इससे पहले, इन हाथियों ने कोटमर्रा गांव में मानकुंवर नामक महिला के घर को ढहा दिया था, जिससे वह बेघर हो गई। दोनों दंतैल अब बीजाडांड के रास्ते केंदई पंडोपारा पहुंचकर डेरा डाले हुए हैं।

कटघोरा वनमंडल के पसान, एतमानगर, और केंदई रेंज में लगभग 50 हाथी अलग-अलग झुंडों में सक्रिय हैं, जिनमें से 24 पसान रेंज में लगातार फसलों और संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे हैं। उधर, कोरबा वनमंडल के कुदमुरा और कोरबा रेंज में भी 50 के करीब हाथी तीन स्थानों पर उत्पात मचा रहे हैं। पसरखेत रेंज के कोल्गा जंगल से 25 हाथियों का दल अब कुदमुरा रेंज के चचिया गांव पहुंच गया है। इस दल ने कोल्गा गांव में एक दर्जन किसानों की धान फसलों को रौंदकर भारी नुकसान पहुंचाया।

कुदमुरा रेंज में एक दंतैल हाथी ने गुरमा गांव में पहुंचकर एक ग्रामीण की झोपड़ी को तहस-नहस कर दिया, जिससे ग्रामीणों में दहशत फैल गई।

कोरबा रेंज के कोरकोमा सर्किल में भी 24 हाथियों का झुंड गेरांव गांव में पहुंचकर 15 ग्रामीणों की फसलों को नष्ट कर चुका है। वन विभाग की टीम नुकसान का आकलन कर रही है और ग्रामीणों को जंगल की ओर न जाने की सलाह दी जा रही है।

हाथियों की बढ़ती संख्या और लगातार उत्पात से क्षेत्र के 150 से अधिक गांव प्रभावित हैं। ग्रामीणों में भय का माहौल है, और किसान खेतों में जाने से डर रहे हैं। वन विभाग ने मुनादी कराकर लोगों को सतर्क रहने की हिदायत दी है, लेकिन स्थायी समाधान के अभाव में ग्रामीणों की चिंता बढ़ती जा रही है।